18 साल पहले अहमदाबाद में हुए सीरियल ब्लास्ट के 38 दोषियों को फांसी, 11 को उम्रकैद

अहमदाबाद। अठारह साल पहले 26 जुलाई, 2008 को अहमदाबाद को दहला देने वाले सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने मंगलवार को विशेष अदालत की ओर से 38 दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा बरकरार रखी है। इसके साथ ही 11 अन्य दोषियों की उम्रकैद भी यथावत रखी है। दोषियों में प्रतिबंधित संगठन इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) और स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) के पूर्व नेता सफदर नागौरी समेत गुजरात, मध्यप्रदेश, केरल, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के आरोपी शामिल है।

जस्टिस ए.वाई. कोगजे और जस्टिस समीर दवे की खंडपीठ ने वर्ष 2022 में विशेष अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए दोषियों की सभी अपीलें खारिज कर दीं। पीठ ने कहा कि दोषसिद्धि और सजा में हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि धमाकों में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों को 10 लाख रुपए, गंभीर रूप से घायलों को पांच लाख रुपए और सामान्य रूप से घायलों को एक लाख रुपए का मुआवजा 30 मार्च, 2027 से पहले वितरित किया जाए। इस मामले में सुनवाई के बाद गत माह फैसला सुरक्षित रख लिया था।

पहला मामला था, जिसमें एक ही यह भारतीय न्यायिक इतिहास का फैसले में 38 दोषियों को मृत्युदंड दिया गया था। अब गुजरात हाईकोर्ट ने भी उस फैसले को पूरी तरह सही ठहराया है।

70 मिनट में हुए 21 धमाकों में 56 की मौत

26 जुलाई, 2008 की शाम 70 मिनट के भीतर अहमदाबाद के अलग-अलग इलाकों में 21 सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 246 से अधिक लोग घायल हुए थे। आतंकियों ने अस्पतालों को भी निशाना बनाया था, जहां पहले धमाकों के घायलों का इलाज चल रहा था। उधर, अहमदाबाद के दो दिनों के बाद सूरत में भी कई जगह बम मिले थे।

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