छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका: ‘बांग्लादेश भेजे’ गए पति का नहीं मिला सुराग, केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बिलासपुर निवासी एक महिला ने अपने पति को कथित तौर पर बांग्लादेश डिपोर्ट किए जाने के बाद उसके लापता होने का आरोप लगाते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका दायर की है। महिला का कहना है कि पुलिस ने उसके पति को बांग्लादेश भेजने का दावा किया था, लेकिन न तो वह वहां पहुंचा और न ही अब तक उसका कोई पता चल सका है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का अंतिम समय दिया है।

याचिकाकर्ता दुर्गा शर्मा ने अपनी याचिका में बताया कि उनके पति सुब्रिती को अगस्त 2025 में पुलिस ने बांग्लादेश भेजने की बात कही थी, लेकिन तब से उनका कोई पता नहीं चल पाया है। उन्होंने अदालत से अपने पति का पता लगाने और पूरी कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि दुर्गा शर्मा और सुब्रिती का विवाह करीब 15 वर्ष पहले हुआ था। उनका दावा है कि सुब्रिती लंबे समय से भारत में रह रहा था और उसके पास भारतीय नागरिकता से जुड़े वैध दस्तावेज भी थे।

याचिका के अनुसार, मार्च 2025 में तोरवा थाना पुलिस ने बांग्लादेश से एक नाबालिग लड़की को भगाने और दुष्कर्म के एक मामले में सुब्रिती का नाम जोड़ते हुए उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद पुलिस ने उसे बांग्लादेश डिपोर्ट कर दिया। हालांकि, महिला का आरोप है कि उसके पति के बांग्लादेश पहुंचने का कोई प्रमाण या जानकारी अब तक उपलब्ध नहीं है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कुछ दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। इस पर महाधिवक्ता ने कहा कि सरकार इन दस्तावेजों को आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनाना चाहती है। हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि दस्तावेज केवल कवरिंग मेमो के रूप में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। अदालत ने निर्देश दिया कि संबंधित जिम्मेदार अधिकारी शपथपत्र के साथ इन दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करें। इसके लिए राज्य सरकार को भी एक सप्ताह का समय दिया गया है।

अब इस मामले की अगली सुनवाई में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत जवाब और शपथपत्र के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

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