कोरबा 05 जुलाई। कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बंजारी की शासकीय उचित मूल्य दुकान में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) से जुड़ा एक बड़ा राशन घोटाला सामने आने से पूरे क्षेत्र में हडकंप मच गया है।

प्रारंभिक जांच में ऐसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिससे न केवल खाद्य विभाग बल्कि जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जांच में पता चला है कि ग्रा पंचायत बंजारी के 402 राशन कार्डधारी हितग्राही जून माह के राशन से पूरी तरह वंचित रहे, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में वितरण संबंधी गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि वे कई बार राशन दुकान के चक्कर लगाते रहे, लेकिन उन्हें खाद्यान्न उपलब्ध नहीं कराया गया।4 जुलाई 2026 को अधिकारियों द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि जून माह का राशन किसी भी पात्र हितग्राही को नहीं मिला है।

ग्रामीणों ने बताया कि राशन वितरण की जानकारी लेने पर उन्हें लगातार टाल-मटोल किया जाता रहा और कई परिवारों को बिना राशनके ही पूरे माह गुजारना पड़ा। जांच के दौरान जब रिकॉर्ड का मिलान किया गया, तब कई गंभीर विसंगतियां सामने आईं, जिसने पूरे मामले को एक बड़े घोटाले का रूप दे दिया। मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया कि करीब 90 हितग्राहियों का बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट) सत्यापन किया गया, लेकिन उन्हें राशन नहीं दिया गया। जांच के दौरान स्वयं राशन विक्रेता ने अपने बयान में स्वीकार किया कि फिंगरप्रिंट लेने के बावजूद संबंधित हितग्राहियों को खाद्यान्न वितरित नहीं किया गया।

इस स्वीकारोक्ति के बाद पूरे मामले में गड़बड़ी और बड़े पैमाने पर हेराफेरी की आशंका और गहरा गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद भी हितग्राहियों को राशन नहीं मिला, तो यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली में गंभीर अनियमितता और संभावित फर्जी वितरण का मामला हो सकता है। जानकारी के अनुसार बंजारी राशन दुकान को प्रत्येक माह लगभग 125 क्विंटल चावल का आवंटन होता है। लेकिन जून माह के आवंटन की जांच में करीब 100 क्विंटल चावल का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं मिल पाया है।

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