वासेपुर का असली गैंगस्टर शब्बीर आलम सालों से छुपा था अंबिकापुर में, पुलिस के हाथों से फिर बच गया

अंबिकापुर। गैंग्स ऑफ वासेपुर की असली कहानी से जुड़ा कुख्यात गैंगस्टर शब्बीर आलम सालों से अंबिकापुर के मोमिनपुरा में पहचान छिपाकर रह रहा था। झारखंड की धनबाद पुलिस उसे गिरफ्तार करने अंबिकापुर तो पहुंची, लेकिन स्थानीय पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगने दी। नतीजा यह हुआ कि सादे कपड़ों में आई धनबाद पुलिस को स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा और इसी हंगामे का फायदा उठाकर मोस्ट वांटेड गैंगस्टर शब्बीर मौके से फरार हो गया। उसके भागने के बाद धनबाद पुलिस ने सरगुजा एसएसपी राजेश अग्रवाल को सूचना दी, जिसके बाद सरगुजा पुलिस ने नाकाबंदी की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

आपको बता दें कि वासेपुर के कोल माफिया व डॉन फहीम खान और शब्बीर आलम के परिवार के बीच कोयले के वर्चस्व को लेकर खूनी रंजिश थी। 18 अक्टूबर 2001 को शब्बीर और उसके भाई शाहिद ने धनबाद के डायमंड क्रॉसिंग के पास फहीम खान की मां नजमा खातून और मौसी शहनाज खातून की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी। साल 2013 में गिरफ्तारी के बाद शब्बीर कोर्ट से फरार हो गया था, जिसके बाद 2018 में धनबाद कोर्ट ने उसे और उसके भाई समेत 7 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

फिल्मी नहीं असली वासेपुर को जानें

झारखंड का धनबाद जिला और उसका इलाका वासेपुर दशकों तक कोयले के अवैध कारोबार, स्क्रैप और रंगदारी के खूनी गैंगवार के लिए बदनाम रहा है। वासेपुर के इसी असली गैंगवार और डॉन फहीम खान व उसके विरोधियों की खूनी रंजिश से प्रेरित होकर मशहूर डायरेक्टर अनुराग कश्यप ने साल 2012 में गैंग्स ऑफ वासेपुर फिल्म बनाई थी। अंबिकापुर से फरार हुआ अपराधी शब्बीर आलम उसी रीयल-लाइफ गैंगवार का मुख्य किरदार है, जिसने वासेपुर के सबसे बड़े डॉन फहीम खान के परिवार पर हमला कर उसकी मां और मौसी को मौत के घाट उतारा था।

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