फ्लैट का कब्जा मिलने के बाद भी बिल्डर के खिलाफ शिकायत कर सकेंगे लोग: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट: देरी पर मांग सकते हैं मुआवजा
नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि अगर बिल्डर ने तय समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं दिया है तो खरीदार कब्जा मिलने के बाद भी उपभोक्ता आयोग में जाकर देरी के लिए मुआवजे की मांग कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि फ्लैट का कब्जा मिलते ही खरीदार उपभोक्ता नहीं रहता और देरी के लिए मुआवजा नहीं मांग सकता। अदालत ने कहा कि यदि किसी की शिकायत फ्लैट का कब्जा दिलाने की नहीं, बल्कि कब्जा देने में हुई देरी के लिए मुआवजा पाने की है तो केवल कब्जा मिल जाने से उसका यह अधिकार समाप्त नहीं हो जाता।
सुप्रीम कोर्ट ने जिला उपभोक्ता आयोग से कहा है, कि वह यह तय करे कि फ्लैट का कब्जा देने में वास्तव में देरी हुई थी या नहीं। अगर हुई तो क्या बिल्डर जिम्मेदार था। क्या खरीदार को मुआवजा दिया जाना चाहिए। यह मामला दिल्ली-एनसीआर के हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़ा है। एक खरीदार को कब्जा मिलने के 22 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसकी याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि वह देरी के लिए मुआवजे की मांग कर सकता है।
मध्यस्थता की शर्त, तो भी है अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी भी फैसला सुनाया। उसने कहा कि यदि खरीदार और बिल्डर के बीच हुए समझौते में विवाद को मध्यस्थता के जरिए सुलझाने का प्रावधान है, तब भी इससे खरीदार का उपभोक्ता आयोग जाने का अधिकार खत्म नहीं होता। उपभोक्ता संरक्षण कानून उपभोक्ताओं को एक अतिरिक्त वैधानिक अधिकार देता है, जिसे किसी निजी अनुबंध की शर्त के आधार पर समाप्त नहीं किया जा सकता।
