रूस-उक्राइना जंग में नया मोड़, क्या रूस ओडेसा पर कब्जा कर लेगा ?– @ डॉ. सुधीर सक्सेना

• डॉ. सुधीर सक्सेना
काला सागर के तट पर बसा उक्राइनी पत्तन-नगर ओडेसा (रूसी में अदेस्सा) खतरे में है। 18 जून को मस्क्वा के उपांत में स्थित तेलशोधक कारखाने पर उक्राइनी द्रोनों की बौछार से तबाही मच गयी और धुयें के स्याह बादल मस्क्वा के आकाश में देखे गये। इससे बौखलाये रूस ने ओडेसा के एक हिस्से पर कब्जे की योजना बना ली है। इस बीच 18-19 जून की दरम्यानी रात उसकी बमबारी से वहां तैनात पूरी फ्रेंच रेजीमेंट नष्ट हो गयी है और योरोप को सबक सिखाने के मकसद से रूस ने ब्रिटेन के राजनयिक को निष्कासित किया है। संकेत हैं कि रूस अपने एक-डेढ़ लाख आरक्षित सैन्य बल को शीघ्र ओडेसा रवाना कर सकता है।
रूसी तेलशोधक संयंत्र पर उक्राइना के दिनदहाड़े द्रोन हमलों के बाद रूस-उक्राइना युद्ध खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन अर्से से यह आरोप लगाते आ रहे हैं कि रूस के खिलाफ जंग में अमेरिका और योरोपीय देश लिप्त हैं। ओडेसा में फ्रेंच होटल और बैरकों पर रूस के जवाबी हमले में अनुमानत: 75 फ्रांसीसी फौजी मारे गये हैं। इससे फ्रांस में शोक की लहर है, किंतु फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बयानबाजी से इसलिये किनारा किया है, क्योंकि उनकी स्वीकारोक्ति से युद्ध में योरोपीय संलिप्तता के पुतिन के आरोप की पुष्टि हो जायेगी। जहां तक उक्राइना में सैन्य ठिकानों का प्रश्न है, रूस को उक्राइना के सामरिक ढांचे की राई-रत्ती जानकारी है, किंतु जैसा कि राष्ट्रपति पुतिन ने कहा है, रूस उक्राइना में आनुपातिक लड़ाई लड़ रहा है। गौरतलब है कि रूस उक्राइना के बीस प्रतिशत भूभाग पर पहले ही कब्ज़ा कर चुका है। ऐसे में यदि वह ओडेसा बंदरगाह पर कब्जा करता है, तो इससे उक्राइना के निर्यात और आर्थिकी पर जबर्दस्त प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। ज्ञात हो कि ओडेसा में बड़ी आबादी रूसियों और यहूदियों की है और वे भावनात्मक रूप से रूस से जुड़े हुये हैं। क्रेमलिन को पता है कि ईरान-अमेरिका में सुलह के बाद अमेरिका और नाटो रूस-उक्राइना जंग को तेज कर रूस पर दबाव बढ़ाने की फिराक में हैं, लिहाजा मारे सो मीर की तर्ज पर क्रेमलिन क्रीमिया की भांति ओडेसा को भी सर कर सकता है।
जहां तक ओडेसा का प्रश्न है, ओडेसा उक्राइना का तीसरा सबसे बड़ा नगर और प्रमुख बंदरगाह है। योरोपीय देशों को ‘गेहूं का कटोरा’ यानि उक्राइना से गेहूं का निर्यात मुख्यत: यहीं से होता है। यहां का सिटी सेंटर वर्ल्ड-हैरीटेज में शामिल है। काला सागर के उत्तर-पश्चिमी तट पर बसा ओडेसा उत्तर और दक्षिण में बँटा हुआ है। उत्तरी द्वीपनुमा हिस्सा दक्षिण से सड़क और रेलपांत के दो पुलों से जुड़ा हुआ था, लेकिन रूस की रात भर की ताजा बमबारी से उत्तर और दक्षिण ओडेसा का संबंध टूट गया है, फलत: रूसी धावे की स्थिति में उक्राइनी सेना दक्षिणी ओडेसा में नहीं आ सकती। रूस की कोशिश होगी कि इस सामरिक स्थिति का लाभ उठाया जाये। यदि ऐसा हुआ तो उक्राइना अपना बड़ा भूभाग खो देगा। बहरहाल, फिलवक्त ओडेसा रूसी हमले की चपेट में है और योरोप चिंताग्रस्त। उल्लेखनीय है कि एक समझौते के तहत रूस ने ओडेसा से उक्राइना के अन्न निर्यात में जंग के बावजूद बाधा नहीं डाली है।
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