नवागांव कला में प्राकृतिक खेती पर जोर, किसानों ने सीखा घन जीवामृत बनाने की विधि

कोरबा 20 जून। खरीफ सीजन के दौरान किसानों को उन्नत एवं प्राकृतिक खेती की तकनीकों से जोडने के लिए कृषि विभाग लगातार प्रयासरत है। नवागांव कला में कृषि सखी द्वारा किसानों को घन जीवामृत तैयार करने की विधि की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में उपस्थित कृषकों ने इस तकनीक को गंभीरता से समझा और अपने खेतों में इसका उपयोग करने की सहमति जताई।
कृषि सखी ने किसानों को बताया कि घन जीवामृत प्राकृतिक खेती का एक महत्वपूर्ण घटक है, जो मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ उसकी उर्वरता और जैविक गुणवत्ता में सुधार करता है। इसके नियमित उपयोग से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है तथा फसलों की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलती है। उप संचालक कृषि देवेंद्र पाल सिंह ने बताया कि कोरबा जिले में खरीफ मौसम की प्रमुख फसल धान है, जिसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। इसके अलावा रबी सीजन में विभिन्न फसलों तथा बागवानी फसलों का उत्पादन भी जिले में लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ-साथ प्राकृतिक खेती की पद्धतियों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित कर रहा है।
उन्होंने बताया कि घन जीवामृत जैसी जैविक तकनीकें मृदा की गुणवत्ता सुधारने, पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने तथा पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इससे खेती की लागत कम होती है और किसानों को बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में सहायता मिलती है। कृषि विभाग का उद्देश्य किसानों को टिकाऊ एवं लाभकारी खेती की ओर प्रेरित करना है, ताकि वे कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें और कृषि को दीर्घकालिक रूप से लाभदायक बना सकें। खरीफ सीजन में इस प्रकार के प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं।
