नहीं बनेगा एल्यूमिनियम पार्क, अब दूसरी जगह की तलाश में अधिकारी

पार्क बनने से सहायक उद्योगों को लाभ
कोरबा 11 जून। काफी समय से एल्यूमिनियम पार्क की स्थापना कोरबा के लिए बहुत बड़ा मुद्दा रहा है और मांग भी। अलग-अलग कारणों से यह हर बार टलता रहा। राज्य की भाजपा सरकार ने कोरबा में ही एल्यूमिनियम पार्क की स्थापना की घोषणा की थी। नई खबर है कि यह पार्क बंद हो चुके 200 मेगावाट पॉवर प्लांट के स्थान पर नहीं बन सकेगा। कारण गजब के हैं, इसलिए अब पार्क के लिए दूसरी जगह तलाशने अफसरों को कहा गया है।
बीते वर्ष सरकार की ओर से घोषित किया गया था कि कोरबा के लिए एल्यूमिनियम पार्क महत्वपूर्ण है। इसलिए व्यवहारिक और सैद्धांतिक रूप से इस दिशा में काम किया जाएगा। 60 के दशक में तत्कालीन मध्यप्रदेश सरकार के द्वारा यहां स्थापित किए गए मध्यप्रदेश विद्युत मंडल के 240 मेगावाट ताप विद्युत गृह की जमीन को चयनित किया गया। लगभग 6 दशक तक इस प्लांट से बिजली का उत्पादन व्यापक दृष्टिकोण से किया गया। बार-बार इकाईयों के बाधित होने और इनके नवीकरण पर भारी भरकम खर्च व प्रदूषण की समस्या को देखते हुए एनजीटी ने प्लांट बंद करा दिया। इस प्लांट के संसाधन कौडियों के दाम पिछली सरकार ने बेच दिए। यही हाल स्क्रैप का हुआ। बड़ी मात्रा चोरों ने पार कर दी। प्लांट की जमीन की उपयोगिता तय करने के लिए इसे एल्यूमिनियम पार्क के लिए उपयुक्त माना गया था। उस समय उम्मीद जगी थी कि यह पार्क बन जाएगा तो कोरबा में ही एल्यूमिनियम से संबंधित सहायक उद्योगों के पनपने का रास्ता तय होगा और इसके जरिए प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इनके माध्यम से हजारों हाथों को न केवल काम मिलेगा बल्कि उनकी जीवन यात्रा आसान होगी। एल्यूमिनियम पार्क की स्थापना की घोषणा के बाद कई तरह की उम्मीद पाल बैठे लोगों को इंतजार करना पड़ा कि आखिर काम कब शुरू होगा। अरसे बाद भी इस तरफ किसी प्रकार की हलचल नहीं हुई। जानकारी मिली है कि अब सीएसईबी के स्वामित्व वाले प्लांट की जमीन पर यह काम होना मुश्किल है।
कब्जा होने के कारण काफी मुश्किलें
दावा किया जा रहा है कि आसपास के इलाके में बेजाकब्जा हो गया है, ऐसे में पार्क की स्थापना काफी पेचिदा हो गई है। फिलहाल पिछले प्रस्ताव को इस वजह से किनारे कर दिया गया है। नई जगह की खोज इस सिलसिले में की जा रही है ताकि ड्रीम प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने का काम प्रशस्त हो सके। सैकड़ों एकड़ जमीन की खोज कहां पर की जानी है और वह क्षेत्र कौन सा होगा, यह तय नहीं है। इन सबके बीच इस बात का ख्याल भी रखा जाना है कि पार्क नजदीक में लगे ताकि कामगारों और अधिकारियों को आने-जाने में सहजता हो। इसके अलावा ट्रंासपोर्टेशन से संबंधित गतिविधियों के खर्चे भी कम हो। फिलहाल यह सब भविष्य की बातें है, लेकिन जिस तरह के कारण पिछली प्रस्तावित जगह को लेकर बताए जा रहे हैं, वे हर किसी को हैरान कर रहे हैं।
