एसईसीएल दीपका ने कोयला उत्पादन के मामले में बनाया रिकार्ड

कोरबा 05 जून। वित्तीय वर्ष दूसरे माह मई में कोयला उत्पादन टारगेट से एसईसीएल की मेगा परियोजना गेवरा व कुसमुंडा पीछे रह गई। माह के टारगेट को दीपका एरिया ने शत-प्रतिशत हासिल किया है। मेगा परियोजनाओं के कम उत्पादन का असर एसईसीएल के प्रदर्शन पर भी पड़ा है। माह में लक्ष्य के मुकाबले लगभग 3 मिलियन टन कम उत्पादन दर्ज किया गया है।

वित्तीय वर्ष में एसईसीएल को 195 मिलियन टन कोयला उत्पादन का टारगेट दिया गया है। सर्वाधिक कोयला उत्पादन कोरबा जिले की खदानों से किया जाना है। वित्तीय वर्ष में कुसमुंडा को 39, गेवरा को 59 व दीपका को 40 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य मिला हुआ है। इस लक्ष्य को हासिल करने हर माह का टागरेट सेट किया जाता है। मई में कुसमुंडा एरिया को 3.47 मिलियन टन का लक्ष्य था। इसके मुकाबले एरिया ने 2.48 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया है। गेवरा एरिया को 5.26 मिलियन टन कोयला उत्पादन करना था। इसके मुकाबले एरिया से 3.49 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया गया है।

दीपका एरिया को 3.56 मिलियन टन का टागरेट था। मई में इस टारगेट को एरिया ने शत-प्रतिशत पूरा किया है। कोरबा एरिया को 0.72 मिलियन टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य मिला था। मई माह के 31 दिनों में कोरबा एरिया से 0.62 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया जा सका है। एसईसीएल को माह में 17.33 मिलियन टन कोयला उत्पादन करना था। माह में एसईसीएल ने 14.42 मिलियन टन कोयला खनन किया है। जिले की मेगा परियोजनाओं के कम उत्पादन का असर एसईसीएल के उत्पादन पर पड़ा है। एसईसीएल के कई एरिया माह के लक्ष्य से पीछे रहे हैं। रायगढ़, जोहिला, सोहागपुर, हसदेव, बैकुंठपुर, चिरमिरी एरिया ने जरूर माह के लक्ष्य से अधिक कोयला खनन कर कंपनी प्रबंधन की चिंताएं दूर की है।

संभवतः 16 जून से प्रदेश में मानसून दस्तक देगा। तीन माह वर्षा ऋतु के दौरान कोयला खदानों के उत्पादन की रफ्तार धीमी पड़ जाएगी। ऐसे में कोयला खदानों में पानी निकासी की व्यवस्था दुरूस्त की जा रही है। खदान में जलभराव की स्थिति न हो इस पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारी लगातार इसकी मॉनिटरिंग भी कर रहे हैं। खासकर ओपन कास्ट परियोजनाओं में कोयला उत्पादन से लेकर डिस्पैच की चुनौतियां बढ़ जाती है। गत वित्तीय वर्ष में एसईसीएल को 212 मिलियन टन का लक्ष्य दिया गया था। इस लक्ष्य को हासिल करने में कंपनी नाकाम रही थी। खासकर जिले की कुसमुंडा परियोजना का प्रदर्शन काफी खराब था। जिसे देखते हुए इस बार कंपनी ने अपना उत्पादन लक्ष्य 212 से घटाकर 195 मिलियन टन कर दिया है। कुसमुंडा एरिया का टारगेट भी 50 से घटाकर इस वित्तीय वर्ष में 39 मिलियन टन किया गया है। गेवरा एरिया का लक्ष्य भी 63 से कम कर 59 मिलियन टन किया गया है। दीपका का टारगेट 40 मिलियन टन यथावत रखा गया है।

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