ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भव्य हसदेव आरती संपन्न, हसदेव संरक्षण के संकल्प के साथ जुटे श्रद्धालु

मुख्य एवं विशिष्ट यजमानों ने नमामि हसदेव सेवा समिति के कार्यों की सराहना कर किया प्रोत्साहित

कोरबा। ज्येष्ठ पूर्णिमा के पावन अवसर पर नमामि हसदेव सेवा समिति द्वारा रविवार सायंकाल मां सर्वमंगला मंदिर घाट, कोरबा में भव्य हसदेव आरती का आयोजन किया गया। हसदेव नदी के संरक्षण, स्वच्छता, सौंदर्यीकरण और पर्यावरण जागरूकता को समर्पित इस आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों एवं पर्यावरण प्रेमियों ने सहभागिता कर हसदेव नदी के संरक्षण का संकल्प लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ विधि-विधान एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां हसदेव और मां सर्वमंगला के पूजन-अर्चन से हुआ। इसके पश्चात दीपों की अलौकिक आभा और भक्ति संगीत के बीच सामूहिक हसदेव आरती की गई। आरती के दौरान पूरा घाट भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो उठा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने हसदेव नदी को स्वच्छ एवं अविरल बनाए रखने का संकल्प भी दोहराया।

इस अवसर पर वनवासी कल्याण आश्रम छत्तीसगढ़ के प्रांत उपाध्यक्ष श्री महेश गुप्ता मुख्य यजमान के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने नमामि हसदेव सेवा समिति द्वारा किए जा रहे जनजागरण एवं नदी संरक्षण के कार्यों की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा कि हसदेव नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि कोरबा जिले की जीवनरेखा है। नदी संरक्षण के लिए समाज को जोड़ने का जो कार्य समिति कर रही है, वह अत्यंत प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और नमामि हसदेव सेवा समिति इस दिशा में एक अनुकरणीय अभियान चला रही है।

विशिष्ट यजमान के रूप में उपस्थित श्री अग्रसेन कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार झा ने कहा कि हसदेव आरती केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का प्रभावी माध्यम बन चुकी है। उन्होंने समिति की निरंतर सक्रियता की प्रशंसा करते हुए कहा कि युवाओं और विद्यार्थियों को भी इस अभियान से जोड़ने की आवश्यकता है ताकि आने वाली पीढ़ियां प्रकृति संरक्षण के महत्व को समझ सकें।

विद्युत गृह उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कोरबा (पूर्व) के प्राचार्य श्री अश्वनी चतुर्वेदी ने कहा कि कोरबा के लिए हसदेव नदी, माँ गंगा के समान है। हसदेव नदी का संरक्षण पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने समिति के सदस्यों द्वारा लगातार किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि जनसहभागिता के माध्यम से ही नदियों को प्रदूषण से मुक्त रखा जा सकता है।

सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गेवराबस्ती, कुसमुंडा के प्राचार्य श्री चिंतामणी कौशिक ने अपने संबोधन में कहा कि नमामि हसदेव सेवा समिति धार्मिक आस्था और पर्यावरण संरक्षण को एक सूत्र में पिरोने का उत्कृष्ट कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पूर्णिमा पर आयोजित होने वाली हसदेव आरती लोगों में नदी और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित कर रही है, जो अत्यंत सराहनीय है।

कमला नेहरू महाविद्यालय, कोरबा के सहायक प्राध्यापक श्री गोविंद माधव उपाध्याय ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नदियों को माता का दर्जा दिया गया है। ऐसे में उनका संरक्षण केवल दायित्व ही नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और नैतिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने समिति द्वारा हसदेव नदी और उसकी सहायक नदियों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि नमामि हसदेव सेवा समिति द्वारा हसदेव नदी के संरक्षण, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, जनजागरण और पर्यावरणीय गतिविधियों के माध्यम से जो कार्य किए जा रहे हैं, वे समाज में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। उन्होंने समिति के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन करते हुए भविष्य में भी इसी समर्पण के साथ कार्य करते रहने का आह्वान किया।

समिति के प्रतिनिधियों ने बताया कि हसदेव नदी एवं उसकी सहायक नदियों को स्वच्छ और संरक्षित रखने के लिए जनसहभागिता अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से प्रत्येक पूर्णिमा पर हसदेव आरती का आयोजन किया जाता है, ताकि लोगों में नदी संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़े और समाज प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों को समझ सके।

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