इंडो-पैसिफिक और ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दों पर साथ आए क्वाड देश

नई दिल्ली. क्वाड देशों (भारत, अमरीका, ऑस्ट्रेलिया और जापान) के विदेश मंत्रियों की मंगलवार को नई दिल्ली में बैठक हुई। इसमें वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच क्वाड देशों ने संदेश दिया कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाली इस ऊर्जा अस्थिरता के सामने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को बंधक नहीं बनने दिया जाएगा। बैठक के बाद इंडो-पैसिफिक एनर्जी सिक्योरिटी पर साझा बयान जारी किया गया। इसमें होर्मुज स्ट्रेट का भी जिक्र किया गया है। सभी सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने आतंकवाद की निंदा करते हुए इससे मिलकर निपटने का साझा संकल्प दोहराया है। इसके अलावा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को आर्थिक रूप से सुरक्षित रखने के लिए तेल, गैस, पेट्रोकेमिकल्स और उर्वरकों की मजबूत सप्लाई चेन बनाने पर भी जोर दिया गया। संयुक्त बयान में दक्षिण चीन सागर में ड्रैगन की दादागिरी पर क्वाड देशों ने आपत्ति जाहिर की। विदेशमंत्री एस. जयशंकर ने बैठक के बाद कहा कि चारों देशों के बीच बेहद उपयोगी और उत्पादक चर्चा हुई है।
क्रिटिकल मिनिरल्स पर समझौता
क्वाड देशों ने दुर्लभ खनिजों को लेकर एक फ्रेमवर्क लांच किया है। इससे चीन के एकाधिकार को भी झटका लगेगा। अमरीकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि इस नए ढांचा रणनीतिक खनिजों के खनन, प्रसंस्करण और रीसाइक्लिंग को मजबूत करने में एक मार्गदर्शक की तरह काम करेगा। इसके तहत चारों देशों का 20 अरब डॉलर निवेश कां लक्ष्य है। भारत-यूएस ने इस रणनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर भी किए हैं।
फिजी में बनेगा बंदरगाह
क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में फिजी में एक बंदरगाह बनाने पर सहमति जताई गई है। इसे प्रशांत महासागर क्षेत्र में चीन को काउंटर करने के लिए बनाया जाएगा। यहां की 37% आबादी भारतीय मूल की है। चीन ने किया विरोधः क्वाड देशों के विदेशमंत्रियों की बैठक से चीन बौखला गया है। उसने विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि देशों के बीच सहयोग, क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए होना चाहिए न कि किसी तीसरे पक्ष को निशाना बनाने के लिए। हम विशेष गुट बनाने का विरोध करते हैं।
