आश्वासन तक सिमटी भूविस्थापितों की समस्याएं, एसईसीएल प्रबंधन इस ओर उदासीन

कोरबा जिले में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की कोयला खदानों के लिए अर्जित लोगों की जमीनों के मामले में रोजगार से लेकर बसाहट और दूसरी समस्याएं अब तक हल नहीं हो सकी है। कभी यहां तो कभी वहां भूविस्थापित इस मसले को लेकर प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। उन्हें आश्वासन जरूर मिल रहा लेकिन नतीजे दूर हैं, इसलिए आए दिन कोयला खनन से लेकर परिवहन गतिविधियां ठप की जा रही है। इतना सब होने पर भी प्रबंधन उदासीन है।

सबसे अधिक तमाशे कुसमुंडा, गेवरा और दीपका क्षेत्र में हो रहे हैं। चरणबद्ध रूप से इस तरह के प्रदर्शन परियोजना प्रभावित इलाकों के लोग कर रहे हैं। इसे उनकी आवश्यकता कहा जा रहा है और मजबूरी भी। समय के साथ कोयला खदानों का दायरा बढ़ता जा रहा है और अपनी मूल जगह से उजड़ते जा रहे हैं। लोगों को कहा जा रहा है कि देश के विकास के लिए इतना तो बर्दाश्त करना होगा। अच्छा मुआवजा और दूसरी जगह पर बसने के नए सपनों के साथ लोगों को उजडने की शर्त मंजूर भी हो जाती है लेकिन बाद में उनके सामने केवल कठिनाईयां होती है। इसलिए बार-बार उन्हें एसईसीएल कार्यालय के सामने प्रदर्शन और कई किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए प्रशासन के पास पहुंचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

अब तक कई बार ऐसे मौके आ चुके हैं जब अपना पूरा काम छोडकर परियोजना प्रभावितों को ऐसे प्रदर्शन का हिस्सा बनना पड़ा। हर बार अधिकारी उन्हें भरोसा देते हैं कि समस्याएं जानकारी में है और इन्हें दूर करने के लिए जल्द काम किया जाएगा लेकिन वो दिन उपस्थित नहीं हो रहा है। जानकारों का कहना है कि इन सब वजह से एसईसीएल को करोड़ों का नुकसान भी हो रहा है। वह चीजों को कब समझेगा, इसका पता खुद उसे नहीं है।

इधर कोरबा क्षेत्र के बलगी और बांकीमोंगरा इलाके में खनन गतिविधियों की वजह से अनेक किसानों की कृषि और गैर कृषि भूमि धंस गई। इस वजह से उन्हें नुकसान हुआ है। उन्होंने एक संगठन के जरिए अपनी बात एसडीएम कटघोरा के सामने रखी। तहसीलदार ने उन्हें भरोसा दिया कि संबंधित क्षेत्रों की ऐसी सूची बनाई जा रही है, जल्द ही डिप्लेरिंग वाले हिस्से का सर्वे करा लिया जाएगा। संगठन की ओर से मांग की गई थी कि जहां कहीं भी इस प्रकार के मसले हैं उनमें प्रभावित लोगों को कम से कम तीन साल की क्षतिपूर्ति दी जाए और सर्वे के बाद जमीन को ठीक कराकर लोगों को वापस किया जाए।

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