अट्टापदी मदु लिंचिंग मामला: केरल HC ने 12 दोषियों की सजा उम्रकैद में बदली, मृतक की मां को मिलेगा ३0 लाख मुआवजा

नईदिल्ली, 26 मई ।अट्टापदी मदु लिंचिंग मामले में ऐतिहासिक फैसला देते हुए केरल हाई कोर्ट ने सोमवार को 12 दोषियों की कैद की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। इन लोगों को 2018 में अट्टापदी में एक जनजातीय युवक की बर्बर भीड़ द्वारा हत्या का दोषी ठहराया गया था। जस्टिस वी. राजा विजयाराघवन और के.वी. जयकुमार की एक डिवीजन बेंच ने मान्नार्क्कड विशेष एससी/एसटी अदालत द्वारा पहले लगाए गए सात साल के कारावास की सजा को बढ़ाकर आजीवन कारावास कर दिया। खंडपीठ ने यह भी निर्देश दिया कि मदु की मां मल्लि को 30 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।

इसके अलावा यह आदेश दिया कि यदि पहले से भुगतान नहीं किया गया है, तो सत्र अदालत द्वारा पहले दिए गए मुआवजे का भुगतान तीन महीने के भीतर किया जाए। अट्टापदी, पलक्कड़ के चिंदक्की जनजातीय बस्ती के रहने वाले 27 वर्षीय मदु को 22 फरवरी, 2018 को एक नजदीकी दुकान से चावल और किराने का सामान चुराने के आरोप में हिंसक भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला था। मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से ग्रस्त और जंगल में एक गुफा में रहने वाले मदु को एक भीड़ ने उसे पहले बांधा और फिर नग्न कर बर्बरता से पीटा था।

इसके बाद उसे अगाली पुलिस के हवाले कर दिया गया। वह पुलिस स्टेशन ले जाते समय मर गया। हाई कोर्ट ने आईपीसी की विभिन्न धाराओं और अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत 12 आरोपितों की सजा को बरकरार रखा, जिसमें आईपीसी की धाराओं 304 और 326 के तहत अपराध शामिल हैं। आजीवन कारावास की सजा पाने वालों में मारक्कार, शम्सुद्दीन, राधाकृष्णन, अबूबकर, सिद्दीक, उबैद, नजीब, जैजुमोन, सजीव, सतीश, हरीश और बिजू शामिल हैं। इनमें से प्रत्येक को 2 लाख रुपये का जुर्माना भी भरने का आदेश दिया गया। हालांकि, बेंच ने पहले आरोपित हुसैन को पर्याप्त सुबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया और अनिश और अब्दुल करीम की बरी करने की सजा को बरकरार रखा।

Spread the word