दो राज्यों में भाजपा की वापसी संगठन को मिली संजीवनी

कोरबा और प्रदेश की टीम को मिला काम का मौका
कोरबा। हर प्रकार के कयासों पर विराम लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में सत्ता की चाबी छीनने में सफलता प्राप्त की, जबकि असम में वह फिर से सरकार बना रही है। कोरबा सहित छत्तीसगढ़ से पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने इन राज्यों में जाकर पार्टी के पक्ष में प्रचार किया है इसलिए परिणामों ने उन्हें खुश किया। दोपहर बाद तस्वीर साफ होने के बाद जश्न की तैयारी है।
छत्तीसगढ़ से उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, विधायक सुशांत शुक्ला को पश्चिम बंगाल, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, वित्त मंत्री ओपी चौधरी सहित कई नेताओं को उनकी क्षमता के आधार पर असम के पोकराझार, डिब्रूगढ़ और सिल्चर भेजा गया था। पार्टी की जनसभाओं से लेकर रोड शो में इन्होंने नेता के बजाय कार्यकर्ता के तौर पर कार्य किया। कोरबा जिले से संगठन के चुनिंदा कार्यकर्ताओं को इन दोनों राज्यों में काम करने का मौका मिला। हिंदी पट्टी की तुलना में इन राज्यों में राजनीतिक वातावरण और दूसरी चुनौतियां कुछ अलग रही। इन सबके बावजूद चुनाव प्रचार के दौरान महसूस किया गया कि डेमोग्राफी बदलने से लेकर हिंसा और अत्याचार का मामला पश्चिम बंगाल में हावी रहा। वहीं असम में भाजपा ने अपनी अनुकूलता वाली सीटों पर पूरा फोकस करने के साथ प्रचार किया और उसे इसका फायदा भी हुआ। आज 8 बजे पांच राज्यों के नतीजों की शुरुआत हुई तो स्थानीय स्तर पर लोगों का ध्यान मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल और असम पर टिका रहा। शुरुआती रूझान से लेकर दोपहर तक भाजपा की दमदार बढ़त ने कार्यकर्ताओं को खुश होने का मौका दिया। कई जगह पर आतिशबाजी कर उन्होंने राज्यों में उलटफेर करने पर खुशी जताई।
जिला भाजपा अध्यक्ष गोपाल मोदी सहित पार्टी कार्यकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल व असम के नतीजों को लेकर कहा कि विशेष तौर पर इन दो राज्यों की जीत बड़े मायने रखती है। यहां के माहौल ने खासतौर पर जनता के मन में जो इमेज बनाई उससे कई महीने पहले ही लगने लगा था कि सरकार जाएगी और पश्चिम बंगाल में नया सूर्योदय होगा। वहीं असम में चौतरफा विकास के साथ-साथ मुख्यमंत्री की लोकप्रियता से तय हो गया था कि वे वापसी करने वाले हैं। बांग्लादेश से लगते इलाकों में जो समस्याएं बनी हुई है और लोगों के सामने पीड़ा है, उसने भी निश्चित तौर पर असम के नतीजों पर अनुकूल असर डाला। भाजपा कार्यकर्ताओं ने कहा कि खेला होबे वाला कांसेप्ट कुल मिलाकर भारी पड़ गया और जनता ने जो मूड बनाया, वह सबके सामने है। पूरे मामले में सुरक्षा के बीच मतदान की भी अपनी भूमिका रही।
