सरोवर धरोहर योजना के अंतर्गत करोड़ों खर्च के बाद भी मुड़ापार तालाब की स्थिति बदहाल

कोरबा 28 अपै्रल। जल स्रोतों को संवारने के लिए बात की जा रही है और योजना बनाने के साथ करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं इसके बाद भी परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं है । नगर पालिक निगम के कोरबा जोन के अंतर्गत आने वाले मुड़ापार तालाब की दुर्गति इसी का उदाहरण है। पिछले वर्षों में अलग-अलग योजना के तहत करोड़ों की राशि इसके विकास पर खर्च की गई लेकिन यहां पर ना तो अपनी संचित हो सका और ना ही सुधार स्थाई रूप ले सका।
पूर्व के वर्षों में शारदा विहार और अब अमरियापारा वार्ड में मुड़ापार तालाव की इसकी स्थिति है। तालाब के इतिहास को लेकर लोगों के अलग-अलग दावे हैं लेकिन मिला-जुला अभिमत यही है कि सैकड़ो वर्षों से तालाब यहां पर रहा है। अतीत में यह 12 महीने पानी की उपलब्धता के साथ लोगों को निस्तार करने में सुविधा दिया करता था और उस समय आसपास की आबादी से लाभान्वित होती रही। बाद के कालखंड में आवासीय और अन्य प्रयोजन से विस्तारवाद के कारण स्थितियां बदली। तालाब अभी भी अपनी संरचना में है लेकिन जिस चीज की कमी है, वह है पानी। वर्ष 2025 में झमाझम हुई बारिश के कारण यह तालाब लबालब हो गया था। लेकिन कुछ महीने बाद ही यहां भी परिवर्तन देखने को मिले और जल की मात्रा आसपास से होते रिसाव के साथ खत्म हो गई । गर्मी के मौसम के आने से पहले ही अब डबरी से भी निम्न स्तर में यहां के नजारे लोगों को दिखाई दे रहे हैं और यही चीज उन्हें कचोट रही है। जितनी मात्रा में यहां पर पानी उपलब्ध है, उसकी उपयोगिता सामान्य विस्तार के लिए हो ही नहीं सकती। लोगों ने बताया कि आसपास के कुछ लोग अब इसे ओपन टॉयलेट के रूप में सुबह शाम इस्तेमाल कर रहे हैं।
तालाबों को साफ सुथरा और उपयोगी बनाने के लिए लगातार दावे हो रहे हैं और काम के साथ प्रचार प्रसार भी। इन सब के बावजूद जो स्थिति है, उससे पता चलता है कि दावों में दम नहीं है। मुड़ापार तालाब में घाट के किनारे से लेकर आसपास के पूरे हिस्से में अपशिष्ट का ढेर लगा हुआ है। हवा चलने पर यहां से उठने वाली दुर्गंध आसपास के लोगों को परेशान करती है। कहा जा रहा है कि अगर इस गंदगी को यहां से हटाने का काम नहीं किया जाता है तो बारिश के मौसम में यह तालाब में आने वाले पानी के साथ मिल जाएगी और फिर स्थिति को खराब करेगी। पिछले वर्ष मुड़ापार तालाब में चार लाख की लागत से छठ घाट और इतनी ही लागत से प्रसाधन गृह का निर्माण कराया गया। इसके अलावा कोई और कार्य करने के लिए ना तो योजना बनाई गई है और ना ही ऐसा कुछ किया गया है।
नगर पालिका निगम के द्वारा सरोवर धरोहर योजना के अंतर्गत पिछले वर्षों में 2 करोड़ की राशि मुड़ापार तालाब को संवारने के लिए खर्च की गई। महापौर जोगेश लांबा के कार्यकाल में मुड़ापार तालाब के गहरीकरण से लेकर पाथवे और स्ट्रीट लाइट का काम किया गया। लेकिन इसका औचित्य बहुत ही ज्यादा सार्थक नहीं हो सका। वर्ष 2019 में नगर पालिका निगम ने एक करोड़ 52 लाख 65 हजार की राशि यहां पर फिर से विकास के लिए खर्च की। तत्कालीन राजस्व और आपदा प्रबंधन मामलों के मंत्री जयसिंह अग्रवाल के द्वारा तालाब का जीर्णोद्धार और विकास का भूमि पूजन किया गया इसके अनुसार मौके पर कामकाज किए गए। जिस हालत में आज तालाब है, उसे देखकर नहीं लगता कि ऐसे कार्यों का कोई मतलब निकल रहा है।
