तेज रफ्तार ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर पलटा, घटना में चालक की मौत

कोरबा 20 अपै्रल। वाहन चालकों को सावधान करने के लिए सडकों के किनारे कई प्रकार के बोर्ड लगाए जाते हैं। इनमें से एक मुख्य है जिस पर लिखा होता है सीमित गति सुरक्षित जीवन। इसके बाद भी रफ्तार पर लगाम लगाने में जब चालक उपेक्षा करते हैं तो इसके गंभीर नतीजे आते हैं। आज सुबह कटघोरा-जेन्जरा बायपास मार्ग पर पतरापाली मोड़ के पास एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर पलट गया। घटना में चालक की दबने से मौत हो गई, वहीं हेल्पर जख्मी हो गया। उसे कटघोरा अस्पताल में भर्ती किया गया है।
सूत्रों के अनुसार ट्रैक्टर तेज गति में था और पतरापाली मोड़ के पास चालक नियंत्रण खो बैठा, जिससे वाहन पलट गया। ट्रैक्टर के नीचे दबने से चालक की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन मौके पर मिली जानकारी के अनुसार उसका नाम राम बताया जा रहा है और उम्र लगभग 23 वर्ष के आसपास है। घटना की सूचना मिलते ही कटघोरा पुलिस प्रभारी धर्म नारायण तिवारी के निर्देश पर टीम यहां पहुंची।
मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। गंभीर रूप से घायल हेल्पर को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज जारी है। पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। यह हादसा कटघोरा थाना क्षेत्र के ग्राम जेन्जरा-पतरापाली इलाके में हुआ, जिसने एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के खतरों को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद यातायात नियमों की अनदेखी जारी है। पुलिस ने लोगों से सावधानीपूर्वक वाहन चलाने और गति सीमा का पालन करने की अपील की है।
कोरबा नगर से लेकर उपनगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों तक इन दिनों रेत परिवहन में लगे बोगस ट्रैक्टरों की बाढ़ सी आ गई है। हालात यह हैं कि सडकों पर दिनभर बिना नंबर प्लेट वाले ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खुलेआम दौड़ती नजर आती हैं। इन वाहनों के आगे-पीछे कोई पंजीयन नंबर नहीं होता, जबकि कुछ पर सिर्फ ‘कृषि कार्य हेतु’ लिखकर नियमों से बचने की कोशिश की जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह से लेकर देर रात तक ये ट्रैक्टर रेत ढुलाई में लगे रहते हैं। शहर की मुख्य सडकों से लेकर अंदरूनी मार्गों तक इनकी आवाजाही लगातार बनी रहती है, जिससे यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है। बिना नंबर और दस्तावेजों के चल रहे इन वाहनों के कारण दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना भी मुश्किल हो जाता है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर परिवहन विभाग और संबंधित जिम्मेदार एजेंसियां इस ओर ध्यान क्यों नहीं दे रही हैं। क्या इन बोगस वाहनों को सडकों पर फर्राटे भरने की खुली छूट दे दी गई है, या फिर जांच और कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है।
