छत्तीसगढ़: जंगल विभाग में जंगल राज..! देखिए वीडियो न्यूज

मातहत को गाली दिया तो वाह – वाह
मातहत ने गाली दिया तो आह-आह !
वरिष्ठ पत्रकार अजय शर्मा की विशेष रिपोर्ट ” न्यूज एक्शन” पर
रायपुर (EXPOSECG) छत्तीसगढ़ के वन विभाग में एक अजीब घटना घटी । वन मंडल में बैठे एक कनिष्ठ अधिकारी ने मंत्रालय में सचिव पद पर असीन वरिष्ठ अधिकारी को लिंग सूचक गली से संबोधित कर दिया । अब वह पुलिंग था या स्त्रीलिंग यह तो वही दोनों जाने, लेकिन मंत्रालय प्रशासन ने देर से ही सही, मगर 15 दिन बाद कनिष्ठ अधिकारी को निलंबित कर दिया।
जाहिर है वरिष्ठ अधिकारी बहुत इज्जतदार रहा होगा । तभी तो कनिष्ठ अधिकारी की पतंग रग्गे से काट दी गई। वैसे यह कोई नई बात नहीं है जिले में बैठे अधिकारियों पर इतना अधिक प्रेशर रहता है कभी वीसी का कभी विधानसभा जानकारी का तो कभी ऑडिट का, बाकी मुख्यालय मीटिंगों के भाग दौड़ का। स्थानीय नेताओं पत्रकारों जनप्रतिनिधियों से आए दिन नोक झोंक, सो अलग। पता नहीं कश्यप उस दिन किस प्रेशर में रहा होगा। पर एक बात तो तय है वन विभाग में निलंबित करने के क्राइटेरिया कर्मचारियों अधिकारियों के लिए अलग-अलग हैं। वरिष्ठ को गाली दो तो निलंबन निश्चित और कनिष्ठ के इज्जत की मांजी बहन जी करो तो वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण।
हम बात कर रहे हैं बलौदा बाजार वन मंडल के अंतर्गत कसडोल सब डिवीजन की। यहां पदस्थ एक रेंजर सुमित साहू ने अपने मातहत मैदानी कर्मचारियों को आए दिन पता नहीं कौन-कौन सी गालियां दी जलील किया , यहां तक कि वन कर्मचारी संघ भी एक लंबी लड़ाई उसके विरुद्ध लड़ गया। मगर इस बार वन विभाग का पूरा अमला लगा हुआ है, उस दोषी रेंजर को बचाने। इस सुमित साहू के विरुद्ध पहले जांच संस्थित की गई वन मंडल स्तर पर और जांच रिपोर्ट को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया।
इसके बाद जब वन कर्मचारी संघ ने आवाज उठाई तो वन संरक्षक ने अन्य डिवीजन के तीन उप वन मंडल अधिकारियों की टीम बनाकर फिर से जांच शुरू की मगर नतीजा अब तक सिफर है। उपवन मंडल अधिकारी यू आर बसंत के नेतृत्व में की गई जांच रिपोर्ट अब तक उनके खींसे से बाहर नहीं निकली है। लिहाजा सुमित साहू के निलंबन की दिशा में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है और वह गरियाबंद जिले में आराम से अपनी सेवाएं दे रहा है। देखना यह है कि गाली गलौज की पुष्टि होने के बाद भी बसंत कंपनी उसको कब तक बचा पाती है। देखिए वीडियो रिपोर्ट –
