राइस मिल में जांच: क्या एक राइस मिल में 400 क्विंटल धान कम मिलने पर भी नहीं बनाया गया प्रकरण.?

कोरबा। गुरुवार को जिले के उरगा क्षेत्र में कस्टम मिलिंग का धान कम पाने के बाद दो राइस मिल सील कर दिए गए। लेकिन सनसनीखेज खबर यह है कि इसी दिन एक अन्य राइस मिल में 400 क्विंटल धान कम मिलने के बाद भी प्रकरण नहीं बनाया गया।

सूत्रों के अनुसार गुरुवार को जिन तीन राइस मिल पर कार्रवाई की गई, उनके सिवाय भी इसी क्षेत्र के एक नेतानुमा व्यापारी के राइस मिल में 400 क्विंटल धान कम पाया गया। लेकिन आश्चर्य जनक रूप से इस मिल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

सूत्रों ने एक और सनसनीखेज दावा किया है। बताया जा रहा है कि करीब एक माह पहले कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर फूड ऑफिसर जी. एस. कंवर ने धनेश और बजरंग राइस मिल में पहले भी छानबीन की थी। तब यहां 30 हजार कट्टी धान कम पाया गया था, लेकिन मामले को कथित रूप से रफा- दफा कर दिया गया था।

आपको बता दें कि कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशानुसार गुरुवार को तहसीलदार कोरबा, अतिरिक्त तहसीलदार, खाद्य निरीक्षक और हल्का पटवारी की संयुक्त टीम ने उरगा स्थित बजरंग राइस मिल और धनेश राइस मिल में धान का भौतिक सत्यापन किया। जांच के दौरान पाया गया कि बजरंग राइस मिल द्वारा वर्ष 2025-26 में 26,570 क्विंटल अर्थात 66,425 बोरी और धनेश राइस मिल द्वारा 6,080 क्विंटल अर्थात 15,200 बोरी धान का उठाव किया गया था। इस प्रकार दोनों मिलों द्वारा कुल 79,625 बोरी धान प्राप्त किया जाना दर्ज था, जबकि सत्यापन में केवल 68,252 बोरी धान ही उपलब्ध पाया गया। इस आधार पर लगभग 11,373 बोरी धान कम होने की पुष्टि हुई। अनियमितता सामने आने पर उपलब्ध धान को जब्त करते हुए संचालक के सुपुर्द कर दिया गया।इसी तरह मनोकामना राइस मिल परिसर में खाद्य अधिकारी जी. एस. कंवर, तहसीलदार विष्णु पैकरा और खाद्य निरीक्षक संतोष कंवर द्वारा धान रीसाइक्लिंग के उद्देश्य से समिति के लिए भेजे जा रहे 100 कट्टी धान को ट्रैक्टर सहित जब्त किया गया और उरगा थाने को सुपुर्द कर दिया गया।

सूत्रों के अनुसार जिले में अनेक राइस मिल ऐसे हैं, जिन्होंने पिछले वर्ष कस्टम मिलिंग के लिए प्राप्त धान के बदले शासन को चावल जमा नहीं किया है। साथ ही उनके मिल में धान भी उपलब्ध नहीं है। लेकिन जिम्मेदार अफसरों की मिलीभगत अथवा लापरवाही के कारण इन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। सूत्रों का कहना है कि कलेक्टर अगर ईमानदार अफसरों की टीम बनाकर जांच कराते हैं तो अनेक राइस मिलों के घपलों का पर्दाफाश हो सकता है।

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