संजय नगर अंडरपास का वर्कऑर्डर इसी सप्ताह, एजेंसी शुरू करेगी काम

दुर्ग की कंस्ट्रक्शन कंपनी को सेतु निगम ने सौंपा काम
कोरबा 13 जनवरी। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत कोरबा के संजय नगर रेलवे क्रासिंग के कारण ट्रैफिक जाम की समस्या से लोगों को उबारने अंडरपास का सपना पूरा होता नजर आ रहा है। लंबी प्रतीक्षा के बाद टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। दुर्ग की कंस्ट्रक्शन कंपनी को सेतु निगम ने यह काम सौंपा है। वर्कऑर्डर इसी सप्ताह होने के साथ एजेंसी अपना काम शुरू करेगी।
दो वर्ष पहले सरकार ने रूचि लेते हुए कोरबा में संजय नगर अंडरपास निर्माण को अनुमति दी। प्रशासन ने जिला खनिज न्यास से कुल लागत से आधी राशि देना तय किया जबकि इतनी ही राशि रेलवे वहन कर रहा है। नहर पुल से स्टेशन को जाने वाले रास्ते पर अंडरपास का निर्माण होना है। दिन भर में 20 से अधिक बार यात्री और मालगाडियों की आवाजाही के कारण रेलवे क्रासिंग बंद होती है जिससे संजय नगर से लेकर पीएच रोड में जाम की समस्या बनती है और लोग हलाकान होते हैं। अंडरपास के निर्माण में इसी को ध्यान में रखा गया है।
छत्तीसगढ़ सेतु निगम के कोरबा स्थित एसडीओ मदन मोहन ओधार ने बताया कि टेंडर की प्रक्रिया पिछले वर्ष पूरी हो चुकी है। यह सही बात है कि इसमें लंबा समय लगा, इसलिए काम भी विलंबित हुआ। अब वर्कऑर्डर की बारी है। अधिकांश कागजी कार्यवाही हो चुकी है इसलिए संभावना है कि इसी सप्ताह वर्कऑर्डर जारी हो जाएगा और इसके बाद प्राथमिक रूप से कामकाज शुरू करने में एजेंसी अपनी भूमिका निभाएगी। उन्होंने बताया कि अंडरपास के लिए अर्जित क्षेत्र के आसपास कुछ मामलों में विवाद की स्थिति है। इस बारे में राजस्व बेहतर रूप से बता सकता है।
संजय नगर अंडरपास के दायरे में शामिल 91 परिसंपत्तियों को हटाने का काम पिछले वर्ष प्रशासन और नगर निगम के द्वारा किया गया। संबंधित लोग सरकारी जमीन पर लंबे समय से काबिज थे। उनके मकान और दुकान यहां पर मौजूद थे जिन्हें बेदखल करने की कार्यवाही की गई। ऐसे अधिकांश मामलों में लगभग 3 करोड़ रुपए की राशि मुआवजा के तौर पर बांटी गई है। इक्का-दुक्का प्रकरणों में प्रभावितों ने नुकसान ज्यादा होने और सामाजिक सुरक्षा का हवाला देते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगाई है। इसलिए ऐसी परिसंपत्तियां अभी भी आंशिक रूप से क्षेत्र में बची हुई है।
स्थानीय लोग मानते हैं कि संजय नगर क्षेत्र में रेलवे क्रासिंग की वजह से बार-बार हो रही समस्या का समाधान करने के लिए अंडरपास अपरिहार्य था और इसे बहुत पहले बन जाना चाहिए था। इसके पीछे राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की कमी रही है, यह कहना गलत नहीं होगा। देर सबेर जब इस तरफ योजना बनी और कदम आगे बढ़ी तो नई अड़चने पैदा हो गई। इन सबके बावजूद जितनी जल्द अंडरपास का निर्माण होता है लोगों को रोज-रोज की समस्याओं से छुटकारा मिलेगा।
याद रहे कोरबा के लिए अंडरपास बड़ा काम माना जा रहा है इससे रेलवे की चुनौतियां भी कम होंगी। खास बात यह है कि रेलवे क्रासिंग नहर पुल के नीचे पाइप लाइन की शिफ्टिंग का काम अभी भी बचा हुआ है। जबकि दूसरे हिस्से में पाइप लाइन को नगर निगम शिफ्ट कर चुका है। बताया गया कि रेलवे के स्थानीय प्रशासन से इस बारे में अनुमति मिलना बाकी है। मामला उसके संज्ञान में है और कई बार रिमांडर दिए जा चुके हैं।
