कई सहकारी समितियों में लटके हैं ताले, लौटने को मजबूर किसान

कर्मचारी हड़ताल पर, धान खरीदी अधर में

कोरबा 18 नवम्बर। अपनी चार मांगों को लेकर आदिवासी सेवा सहकारी समिति के प्रबंधक और कर्मचारी हड़ताल पर अडिग है। सरकार ने एसमा का डर दिखाया लेकिन इसका कोई खास असर नहीं हुआ। पौड़ी उपरौड़ा विकासखंड के कई केदो में वैकल्पिक रूप से नई नियुक्ति की गई है लेकिन कर्मियों का अता-पता नहीं है। ऐसी स्थिति में किसान यहां पहुंच कर बैरंग लौटने मजबूर है।

आदिवासी सेवा सहकारी समिति में अभी भी ताले लटके नजर आ रहे हैं। प्रशासन में स्थिति को सामान्य करने के लिए कोशिश शुरू की है लेकिन इसके कोई खास परिणाम सामने नहीं आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार थोड़ी उपरोड़ा विकासखंड मैं कृषक वर्ग को राहत देने के लिए प्रशासन की ओर से अनेक समितियां में कंप्यूटर ऑपरेटर की नियुक्ति की गई है ताकि व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित किया जा सके। इस तरह के आदेश होने पर भी नए कर्मचारियों के द्वारा मौके पर कामकाज ग्रहण नहीं किया गया है। यह बात अलग है कि किसानों को सहूलियत देने के इरादे से इस वर्ष ऑनलाइन टोकन प्रदान करने की सुविधा शुरू की गई।

बताया गया कि इस टोकन के आधार पर लोगों को अपनी पैदावार बेचने की तारीख दी जा रही है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल इसी बात का है कि जब केंद्र में कर्मचारी और श्रमिक ही मौजूद नहीं है तो धान की खरीदी आखिर कैसे हो। ऐसी स्थिति में टोकन लेकर जाने वाले कर्मचारी भी उपार्जन केंद्रों से वापस लौटने को विवश है। कर्मचारियों का दबाव बनाने के लिए शुरुआती स्तर पर कोरबा जिले में दो खरीदी केदो के प्रबंधक के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

माना जा रहा था कि यह सब तिकड़म करने से दूसरे केदो के कर्मचारियों पर दबाव बढ़ेगा और वह हड़ताल छोडकर कार्यस्थल पर लौटने की मानसिकता बनाएंगे, लेकिन यह पैतरा काम नहीं आ सका। वर्तमान में सेवा सहकारी समितियां का स्टाफ हड़ताल पर है। दूसरी ओर धान खरीदने के लिए कृषि, राजस्व और खाद्य विभाग के जिन अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है उन्होंने भी अपने हाथ लगभग खींच लिए हैं। ऐसे में 31 जनवरी तक कोरबा जिले में 30 लाख मैट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य कैसे पूरा हो सकेगा, यह अपने आप में चिंता का विषय तो बना हुआ ही है।

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