कोरबा : एल्युमिनियम पार्क की जमीन पर बन रहा राखड़ पार्क, ठेकेदारों से मिलीभगत कर करोड़ो डकार रहे विद्युत कंपनी के अधिकारी.. सुशासन सरकार का कर रहे मुँह काला

कोरबा 26 अक्टूबर। प्रदेश की भाजपा सरकार के द्वारा जब कोरबा में बहुप्रतीक्षित एल्युमिनियम पार्क स्थापित करने की घोषणा की गई तब ऐसा प्रतीत हो रहा था जिले में विकास का एक नया अध्याय लिखा जाएगा। परंतु सुशासन सरकार के सिपहसालारों के द्वारा सरकार की इस विकास गाथा को विनाश गाथा में परिवर्तित करने का कार्य किया जा रहा है।
ज्ञात हो कि प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के पश्चात कोरबा की बहुप्रतीक्षित मांग को पूरा करते हुए विष्णुदेव साय की सरकार ने जिले में एल्युमिनियम पार्क स्थापित करने की घोषणा की। इसके लिए वर्षों से बंद पड़े कोरबा थर्मल पावर स्टेशन (KTPS) कोरबा पूर्व प्लांट की 105 हेक्टेयर भूमि को उद्योग विभाग को हैण्डओवर करने का निर्णय लिया गया, जो की प्रक्रियाधीन है। परंतु शासन की इस महत्वाकांक्षी योजना को खुद मुख्यमंत्री के विभाग अर्थात छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी के अधिकारी ही पलीता लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। अधिकारियों द्वारा के.टी.पी.एस प्लांट तथा आसपास के क्षेत्र में लाखों टन राखड़ नियम विरुद्ध तरीके से पटवाया जा रहा है और ठेकेदारों से मिलीभगत कर करोड़ो रुपयों का वारा न्यारा किया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कोल आधारित विद्युत संयंत्र से उत्सर्जित राख के निपटान हेतु विद्युत कंपनी के द्वारा राख को निचले इलाकों में डंप करने निविदा आमंत्रित की गई थी। निविदा प्राप्त करने वाले ठेकेदारों व ट्रांसपोर्टरों को गोढ़ी स्थित राखड़ बांध से राखड़ लोड कर 50 किलोमीटर के दायरे में निचले इलाकों में राखड़ पाटने का निर्देश था जिसके लिए उन्हें प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान किया जाना था। परंतु विद्युत कंपनी के अधिकारियों द्वारा ठेकेदारों से मिलीभगत कर गोढ़ी स्थित राखड़ डैम से राख न उठवाते हुए कोरबा स्थित डी.एस.पी.एम ताप विद्युत गृह के साईलो से राख लोड करवाया जा रहा है और उसे मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बंद पड़े के.टी.पी.एस प्लांट में विधि विरुद्ध तरीके से डंप करवाया जा रहा है। इस प्रकार विद्युत कंपनी के अधिकारियों द्वारा एक साथ दो-दो घोटालों को अंजाम दिया जा रहा है।
पहला घोटाला : आमंत्रित निविदा अनुसार राख को निचले इलाकों में डंप किया जाना था परंतु अधिकारियों द्वारा उसे बंद पड़े के.टी.पी.एस कोरबा पूर्व प्लांट में ही डंप करवाया जा रहा है जो नगर के बीच स्थित है और निचले इलाकों में नहीं आता।
दूसरा घोटाला : आमंत्रित निविदा अनुसार ठेकेदारों व ट्रांसपोर्टों को गोढ़ी स्थित राखड़ डैम से राख लोड करना था। परंतु अधिकारियों द्वारा ठेकेदारों से मिलीभगत कर डी.एस.पी.एम प्लांट के साईलो से राख लोड करवाया जा रहा है। डी.एस.पी.एम प्लांट और के.टी.पी.एस की दूरी मात्र 2 किलोमीटर है, वहीं गोढ़ी से राख लोड करने की दशा में यह दूरी लगभग 25 किलोमीटर पड़ती। इस प्रकार ठेकेदार को 23 किलोमीटर की ट्रांसपोर्टिंग का फर्जी भुगतान तो प्राप्त हो ही रहा है साथ में राख लोड करने के खर्चे की बचत भी हो रही है। इसके एवज में ठेकेदारों/ट्रांसपोर्टरों द्वारा अधिकारीयों को मोटी रकम सेवा शुल्क के रूप में प्रदान की जा रही है।

राखड़ पटवाने का यह कार्य विद्युत कंपनी के अधिकारियों द्वारा पिछले 6 माह से किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा अगस्त 2025 में बंद पड़े के.टी.पी.एस प्लांट की 105 हेक्टेयर भूमि को एल्युमिनियम पार्क स्थापित करने हेतु उद्योग विभाग को हैण्डओवर करने की घोषणा की गई थी। इसके पश्चात भी विद्युत कंपनी के अधिकारियों के द्वारा बेरोक टोक लाखों टन राखड़ प्लांट की भूमि में डंप किया जा रहा है।

प्राप्त जानकारी अनुसार राखड़ डंपिंग के इस कार्य में विद्युत कंपनी के अधिकारियों और ठेकेदारों द्वारा नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही है। राख ट्रांसपोर्ट कर रहे ठेकेदारों को पर्यावरण विभाग से एनओसी प्राप्त नही है। साथ ही उनके द्वारा नगर के मुख्य मार्गो तथा घनी आबादी वाली बस्तियों से गुजरते हुए राख ट्रांसपोर्ट किया जा रहा है जो उड़कर सड़क में चल रहे नागरिकों के फेफड़ों को खराब कर ही रहा है साथ ही आसपास स्थित स्कूलों व बस्तियों में फैलकर बड़ी स्वास्थ्य तथा पर्यावरण समस्या उत्पन्न कर रहा है। अब यक्ष प्रश्न यह उठता है की क्या विद्युत कंपनी का यह कृत्य पर्यावरण विभाग व जिला प्रशासन को अंधेरे में रखकर किया जा रहा है? अगर नहीं तो नियमों की अनदेखी क्यों? क्या भ्रष्टाचार को मूर्त रूप देने की मंशा से विद्युत कंपनी द्वारा भूमि हैण्डओवर में विलंब किया जा रहा है?
कोरबा में एल्युमिनियम पार्क की स्थापना का उद्देश्य लघु उद्योग स्थापित कर रोजगार और व्यवसाय के अवसर उत्पन्न करना था परंतु जिस प्रकार से पार्क हेतु चिन्हांकित भूमि पर लाखों टन राखड़ डंप किया जा रहा है उससे यह प्रतीत होता है की निकट भविष्य में डंप किए गए राखड़ के निपटारे हेतु एल्युमिनियम पार्क की जगह राखड़ पार्क स्थापित करने की आवश्यकता जरूर पड़ेगी।
