फ्लोरामेक्स ठगी मामलाः पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर ने राज्य सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

कोरबा। भाजपा के वरिष्ठ आदिवासी नेता पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर ने कोरबा जिले में लगभग 40000 महिलाओं के साथ में फ्लोरामेक्स के द्वारा अरबों रुपए की ठगी के मामले को केंद्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के समक्ष सुनवाई हेतु शिकायत पत्र दिया था। शिकायत पर केंद्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने स्वत: संज्ञान लेकर मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन को 01/01/2025 को नोटिस जारी किया था। नोटिस के बाद कोरबा कलेक्टर से रिपोर्ट मंगाया गया। ननकीराम का कहना है कि रिपोर्ट में मनगढ़ंत भ्रामक व गलत जानकारी राज्य सरकार को भेजकर राज्य सरकार को धोखे में रखकर गुमराह किया गया। राज्य सरकार ने कलेक्टर की रिपोर्ट को बिना जांच पड़ताल किए केंद्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के समक्ष प्रस्तुत कर दिया।

रिपोर्ट के बाद ननकी राम कंवर ने वास्तविक जानकारी से केंद्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को अवगत कराया और कहा गया कि फ्लोरामैक्स मामले में किए गए FIR में 120 करोड़ का निवेश बतलाया गया है जबकि बिना आंकड़ा के व बिना सही जानकारी के कलेक्टर ने राज्य सरकार को केवल 12 करोड़ रूपये 30000 ग्रामीण एवं शहरी महिलाओं से निवेश कराए गए हैं, की बात लिखकर भेजा था। इस मामले में केंद्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने प्रकरण दर्ज कर प्रकरण को संज्ञान में लेकर मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन को 16 अक्टूबर 2025 को दिल्ली में उपस्थिति हेतु नोटिस जारी किया है।

0 यह लिखा है नोटिस में
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (भारत के संविधान के अनुच्छेद 338क के अंतर्गत एक संवैधानिक निकाय) के अनुसंधान अधिकारी चेतन कुमार शर्मा ने मुख्य सचिव को प्रेषित सिटिंग नोटिस में कहा है कि:-
,चूंकि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एन.सी.एस.टी.) ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 338 क के अधीन प्रदत्त शक्तियों के अनुसरण में उक्त उल्लिखित प्रकरण का अन्वेषण करने का निश्चय किया है। अंतर सिंह आर्य, माननीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने इस प्रकरण में अन्वेषण/जांच की जाने वाली कार्रवाई के लिए आयोग मुख्यालय, 6वां तल, न्यायालय कक्ष, लोकनायक भवन, खान मार्केट, नई दिल्ली-110003 में दिनांक 16.10.2025 को सिटिंग/सुनवाई निर्धारित की है।

तदनुसार, आपसे (मुख्य सचिव से अनुरोध है कि कृपया उक्त निर्धारित तिथि एवं समय पर उक्त मामले से संबंधित संपूर्ण तथ्यों एवं सभी संगत मूल अभिलेखों/दस्तावेजों के साथ व्यक्तिगत रूप से माननीय अध्यक्ष के समक्ष परीक्षण के लिए उपस्थित होना सुनिश्चित करें। 3. कृपया ध्यान रखें कि यदि आप बैठक में उपस्थित नहीं होते/होती हैं तो आयोग के समक्ष आपकी उपस्थिति को बाध्यकारी बनाने के लिए, आयोग भारत के संविधान के अनुच्छेद 338 क के खंड (8) क के अधीन प्रदत्त सिव्रिल न्यायालय की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए स्वतंत्र है।

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