कोयला खनन पर हाईकोर्ट ने खारिज की हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति की याचिका

कोयला खनन पर हाईकोर्ट ने खारिज की हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति की याचिका
बिलासपुर 9 अक्टूबर 2025 – हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोयला खनन के खिलाफ दायर याचिका पर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने ग्राम घाठबर्रा के निवासियों की दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि सामुदायिक वन अधिकार का कोई ठोस दावा साबित नहीं हुआ है।
क्या था मामला?
हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति और जयनंदन सिंह पोर्ते ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी, जिसमें कहा गया था कि घठबार्रा गांव के लोगों को वन अधिकार कानून 2006 के तहत सामुदायिक अधिकार मिले थे, जिन्हें 2017 में जिला समिति ने रद्द कर दिया।
हाईकोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार के वर्ष 2012 और 2022 के आदेशों को सही ठहराया, जिनके तहत पारसा ईस्ट एवं केते बासन (पीईकेबी) कोल ब्लाक के फेज-1 और फेज-2 में खनन की मंजूरी दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि खनन के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। ग्रामसभा की बैठकों और अभिलेखों में सामुदायिक वन अधिकारों से जुड़ा कोई दावा या प्रमाण नहीं मिला।
राज्य सरकार की दलील
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजकुमार गुप्ता ने कहा कि हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति कोई वैधानिक संस्था नहीं है, इसलिए वह ग्रामसभा या गांववालों की ओर से सामुदायिक अधिकार का दावा नहीं कर सकती।
अदालत ने खनन परियोजना को वैध बताते हुए केंद्र व राज्य सरकार के आदेशों को बरकरार रखा है। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई की और याचिका खारिज कर दी।
