हजार करोड़ के बजट वाला कोरबा की सडकें बना गड्ढों का शहर

कोरबा 24 सितंबर। हजार करोड़ के बजट वाला कोरबा शहर आज सडक नहीं बल्कि गड्ढों का शहर बनकर खड़ा है। जिला खनिज न्यास, नगर निगम और कॉरपोरेट कंपनियों की मोटी रकम के बावजूद हालात ऐसे हैं कि यह समझना मुश्किल है सडक गड्ढों में है या गड्ढे सडक में।नया बस स्टैंड और प्रेस परिसर की ओर जाने वाली सडक पर हालत सबसे खराब है। जगह-जगह गड्ढों से सडक गायब हो चुकी है। पावर हाउस रोड पर जल संसाधन विभाग की नहर के पास गड्ढों का इतना दबदबा है कि गाडियों को मोडने और आवाजाही करने में लोगों को पसीना छूट रहा है।
शारदा विहार आवासीय परिसर जाने वाली सडक पर तो हाल और भी बेहाल हैं। रेलवे क्रॉसिंग से ठीक पहले बना गहरा गड्ढा हर दिन हादसे को न्योता देता है। वहीं रेलवे क्रॉसिंग के गड्ढे पहले से ही लोगों का सिरदर्द बने हुए हैं। बुधवारी से घंटाघर मार्ग भी गड्ढों की मार से अछूता नहीं है। सामान्य दिनों में उड़ती धूल लोगों का जीना हराम कर देती है और बरसात में यही गड्ढे तालाब बनकर नई मुसीबत खड़ी कर देते हैं। परेशान लोग कहते हैं कोरबा की सडकों के इस रात की शायद कोई सुबह नहीं। मुस्कुराइए, आप जोखिम वाले रास्ते पर हैं..
कोरबा में सडकों की हालत पहली बार इस तरह की हुई है, ऐसा भी नहीं है। पिछले कई वर्षों से मौसम की मेहरबानी कहें, तकनीकी खामियां या फिर कोरबा के लोगों की किस्मत। बारिश के बाद समस्याएं इस तरह की बनी जाती हैं और कुल मिलाकर लोगों को परेशान होना पड़ता है । वर्ष 2025 में भी इसी प्रकार के अनुभव लोगों को हो रहे हैं इन सडकों पर आवाजाही करने के मामले में । सडकों की हालत ऐसी है कि पैदल चलना हो या गाड़ी से जाना-दोनों ही आत्मघाती मिशन साबित हो रहे हैं। पावर हाउस रोड को आप गड्ढों का हॉटस्पॉट कह सकते हैं।
शारदा विहार आवासीय परिसर जाने वालों को रेलवे क्रॉसिंग से पहले बने गहरे गड्ढे का स्वागत करना पड़ता है। ऊपर से क्रॉसिंग के पुराने गड्ढे तो जैसे स्थायी सरकारी कर्मचारी बनकर लोगों को रोज तंग करते हैं। बुधवारी से घंटाघर मार्ग पर सामान्य मौसम में गुबार और बारिश में कीचड़ लोगों की जान का दुश्मन बना हुआ है। संबंधित क्षेत्र के लोगों से हमने बातचीत की तो उन्होंने जो कुछ कहा उसका मिला-जुला सार यह है कि यहां सडकें नहीं, मौसम के हिसाब से बदलते गड्ढों का एक्सपीरियंस जोन है।
