कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) कटघोरा-कोरबा के अधिकारी-कर्मचारियों ने किया कलम बंद हड़ताल

कोरबा 24 सितंबर। फोरम ऑफ केवीके एंड एआईसीआरपी के राष्ट्रव्यापी आह्वान के समर्थन में इन्दिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), कटघोरा, कोरबा के अधिकारी-कर्मचारियों ने आज कलम बंद हड़ताल एवं प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया।

यह आंदोलन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की भेदभावपूर्ण नीतियों के विरोध में और वन नेशन, वन केवीके, वन पॉलिसी की माँग को लेकर किया गया। कर्मचारियों ने सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक केंद्र पर ही एकत्रित होकर विरोध-प्रदर्शन किया। उन्होंने तैयार किए गए बैनर और प्लेकार्ड्स के माध्यम से अपनी माँगों को रखा और ष्हमें चाहिए न्याय, वन नेशन-वन केवीके-वन पॉलिस जैसे नारों के साथ आईसीएआर की भेदभावपूर्ण रवैये के खिलाफ आवाज बुलंद की।

कृषि विज्ञान केन्द्र कटघोरा, कोरबा के प्रतिनिधि ने बताया कि यह विरोध केवल वेतन के लिए ही नहीं, बल्कि सम्मान और समान अधिकारों की लड़ाई के लिए है। हम आईसीएआर के अधीन काम करने वाले अपने सहयोगियों के समान ही जिम्मेदारियाँ निभाते हैं। लेकिन वेतन, पदोन्नति, भत्तों और सेवानिवृत्ति लाभों में हमें लगातार दोयम दर्जे का व्यवहार झेलना पड़ रहा है। यह अन्यायपूर्ण है और इसे तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि देश के 91ः केवीके आईसीएआर के अलावा राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, एनजीओ और राज्य सरकारों द्वारा संचालित हैं। फोरम का आरोप है कि आईसीएआर द्वारा गैर-आईसीएआर केवीके के कर्मचारियों के साथ व्यवस्थित भेदभाव किया जा रहा है, जो संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।

केवीके कोरबा के कर्मचारियों ने फोरम के निर्णय का पूर्ण समर्थन करते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी माँगों पर शीघ्र ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आगामी टज्ञै। (रबी) अभियान (3-18 अक्टूबर 2025) का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। उन्होंने आईसीएआर और केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करके परोदा समिति की सिफारिशों को लागू करने और सभी केवीके कर्मचारियों के लिए एकसमान नीति सुनिश्चित करने की माँग की है। इस आंदोलन का उद्देश्य केवल कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना ही नहीं, बल्कि केवीके प्रणाली की दक्षता बनाए रखना भी है, ताकि किसानों को निर्बाध रूप से बेहतर सेवाएं मिलती रहें।

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