जीवन में संतुलन के लिए आत्मिक शक्ति और आध्यात्मिकता जरूरी

कोरबा 15 सितंबर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय विश्व सदभावना भवन में आज अभियंता दिवस पर आयोजन हुआ। यहां पर इस बात को रेखांकित किया गया कि जीवन में संतुलन के लिए आत्मिक शक्ति और आध्यात्मिकता क्यों जरूरी है। अभियंताओं ने इस विषय पर रोशनी डाली।

कार्यक्रम में क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी परमेन्द्र पाण्डेय, बिजली उत्पादन कंपनी के पूर्व निदेशक सी.पी.पाण्डेय, इन्फ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड एक्स जी.एम विद्युत सरकार, बी. के. रुक्मणी , बी. के. बिंदु थे। उन्होंने दीप प्रज्जवलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर अतिथियों ने कहा कि जीवन के विभिन्न क्षेत्रों को संवारने के लिए अलग-अलग क्षेत्र से जुड़े लोग अपन भूमिका निभाते हैं। उसी प्रकार निर्माण और शिल्प के मामले में अभियंताओं की सबसे अहम भूमिका होती है। ड्राइंग डिजाइन से लेकर मानक व गुणवत्ता की कसौटी पर निर्माण को खरा साबित करने में अभियंता अपना योगदान देते हैं। इस अवसर पर यह भी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया कि परिस्थितियों को हल्केपन से ले, जब हम भीतर से शक्तिशाली बनते है तभी वहार की व्यस्तताओं में संतुलन बना पाना संभव होता है।

सी.पी. पाण्डेय ने कहा की वर्क लाइफ बैलेंस केवल अभियंताओं के लिए ही नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए आवश्यक है जो अपने कार्य और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाये रखना चाहता है। परमेन्द्र पाण्डेय ने कहा की जब हम आत्मिक दृष्टिकोण से जीवन को देखते है तो हमे भीतर से शक्ति, धैर्य और सकारात्मकता मिलती है।

वी. के. रुक्मणी ने अपने आशीर्वचन में कहा की परमपिता परमात्मा शिव इस श्रृष्टि पर आकर के बहुत सुन्दर दुनिया का नवनिर्माण कर रहा है जहा कोई दुरूख नहीं होगा अशांति नहीं होगी परेशानी नहीं होगी डिप्रेशन नहीं होगा और न ही कोई तनाव होगा । विद्युत सरकार जी के द्वारा धन्यवाद व्यापन किया गया साथ ही उन्होंने अपना अनुभव भी सबके समक्ष रखा ।

अंत में सभी अभियंताओ को ईश्वरीय सौगात भेट किया गया। कार्यक्रम में कुमारी सौम्या ने स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया, साथही एस.बी.आई. बालको के पूर्व बैंक मेनेजर भ्राता ए. के. शर्मा ने अपना गीत प्रस्तुत किया 7 साथ ही बी. के. विद्या दीदी द्वारा सभी को पीपीटी के माध्यम से जीवन जीने की कला सिखाया गया एवं सभी को राजयोग का अभ्यास भी कराया गया 7 साथ ही सभी को ब्रह्मकुमारिज संस्थान के मुख्यालय माउंट. आबू जाने का निमंत्रण भी दिया गया। मंच का सफल संचालन बी. के. स्मृति वहन द्वारा किया गया ।

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