डी के हॉस्पिटल कहीं अनैतिक कारोबार का अड्डा तो नहीं बन गया है.? पुलिस की निष्पक्ष जांच से हो सकता है कोई बड़ा खुलासा..!

डी के हॉस्पिटल कहीं अनैतिक कारोबार का अड्डा तो नहीं बन गया है.? पुलिस की निष्पक्ष जांच से हो सकता है बड़ा खुलासा..!
कोरबा। शुक्रवार 12 सितंबर 2025 को दो खबरों ने शहर में सनसनी फैला दी। पहली खबर थी- डी के हॉस्पिटल टी पी नगर में एक नाबालिग की गोपनीय तरीके से कराई गई डिलेवरी और दूसरा न्यूज था हसदेव नदी के किनारे एक प्री- मेच्योर शिशु का शव बरामद हुआ। दोनों ही मामले में सिटी कोतवाली पुलिस रिपोर्ट दर्ज कर जांच कर रही है।
गैरकानूनी लिंग परीक्षण, सफेदपोश परिवारों के प्रेम संबंध जनित अवैध गर्भपात, कन्या शिशु का एबॉर्शन जैसी खबरें कोरबा के आसमान में अक्सर तैरती रहती हैं। शहर के कुछ डाक्टर और नर्सिंग होम के नाम भी चर्चा में आते रहते हैं। लेकिन अवैध कृत्य के बाद पहली बार कोई नर्सिंग होम रंगे हाथों पकड़ा गया है। डी के हॉस्पिटल टी पी नगर में गोपनीय तरीके से नाबालिग की डिलेवरी कराने का मामला वार्ड के लोगों की जागरूकता और मीडिया की सक्रियता से 11 सितंबर की देर शाम उजागर हुआ और अंततः 12 सितंबर को इस मामले में सिटी कोतवाली में अनाचार और पॉक्सो एक्ट के तहत जुर्म दर्ज किया गया।
डी के हॉस्पिटल कांड में परत दर परत जो तथ्य उभर कर सामने आ रहे हैं उससे एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि कहीं डी के हॉस्पिटल अनैतिक कार्यों का अड्डा तो नहीं बन गया है.? दरअसल नाबालिग की डिलेवरी को लेकर जो तथ्य सामने आए हैं, वे इस संदेह को जन्म देते हैं।

इस मामले में पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करने वाली प्रार्थीय सुषमा के अनुसार नाबालिग को 9 सितंबर 2025 को डी के हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। 9 सितंबर को ही आपरेशन से नाबालिग ने एक बच्ची को जन्म दिया। लेकिन इस मामले को हॉस्पिटल प्रबंधन ने 11 सितंबर की देर शाम तक छुपाकर रखा। जबकि किसी भी विवाहित (अपवाद) अथवा अविवाहित नाबालिग कन्या की डिलेवरी कराना हो तो हॉस्पिटल को पेशेन्ट के एडमिशन के साथ ही जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और क्षेत्रीय पुलिस स्टेशन में सूचना देना होता है। अगर पेशेन्ट सीरियस हो तो उसकी डिलेवरी के बाद दोनों स्तर पर नाबालिग के प्रसव की सूचना देना चाहिए। लेकिन डी के हॉस्पिटल प्रबंधन ने 10 सितंबर और 11 सितंबर की देर शाम (संध्या) तक CMHO और पुलिस को कोई सूचना नहीं दी। अर्थात नाबालिग के प्रसव को छुपाने का असंदिग्ध प्रयास किया गया।
इसी दरम्यान 11 सितंबर की संध्या उस वार्ड के कुछ नागरिकों को अनब्याही नाबालिग की डिलेवरी होने और उसके कथित रूप से सीरियस होने की खबर मिल गई। वे लोग एकत्र होकर डी के हॉस्पिटल पहुंच गए और यह खबर मीडिया तक भी पहुंच गई। एक मीडिया कर्मी भी हॉस्पिटल पहुंच गए। फिर कुछ अन्य लोग भी वहां आ गए जो मीडिया कर्मी और वार्ड के लोगों पर मामले में हस्तक्षेप नहीं करने का दबाव बनाने लगे। मामले ने यहीं तूल पकड़ लिया। मीडिया कर्मी ने पुलिस से संपर्क किया और मामले में जानकारी चाही। पुलिस टालमटोल करती रही, किंतु इसी दौरान सोशल मीडिया पर खबर वायरल हो गई।
इस सिलसिले में न्यूज एक्शन ने CMHO डॉ एस एन केसरी से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि 11 सितंबर की रात के वक्त डी के हॉस्पिटल प्रबंधन ने फोन पर नाबालिग की डिलेवरी कराने की सूचना दी थी। उन्होंने प्रबंधन को लिखित में जानकारी भेजने के लिए निर्देशित किया था। CMHO डॉ एस एन केसरी के इस कथन से स्पष्ट हो जाता है कि 9 सितंबर से 11 सितंबर की रात तक डी के हॉस्पिटल प्रबंधन ने मामले को छुपाकर रखा था और जब 11 सितंबर की संध्या नाबालिग के प्रसव को लेकर हलचल होने लगी और बात पुलिस तक पहुंच गई तब उसने नाबालिग के प्रसव की सूचना रात के समय CMHO डॉ एस एन केसरी को मोबाइल फोन पर दी।
कहना ना होगा कि यह पूरा घटनाक्रम डी के हॉस्पिटल की कार्यपद्धति को संदिग्ध बना देता है। इस घटनाक्रम से शहर में आए दिन सुनने में आने वाली उन अनैतिक कारोबार की चर्चाओं को भी बल मिलता है, जिसमें अवैध लिंग परीक्षण और अवैध गर्भपात की बात की जाती है। लेकिन यह पहला मामला है जिसमें किसी हॉस्पिटल/ नर्सिंग होम की संदिग्ध गतिविधि का पर्दाफाश हुआ है। इसी लिए यह सवाल मौजूं हो जाता है कि क्या डी के हॉस्पिटल अनैतिक कारोबार का अड्डा बन गया है.? और यह भी कि कोरबा में ऐसे कितने अड्डे संचालित हो रहे हैं?
