कोरबा के जीएसटी अधिकारी पर जिले के व्यापारियों ने लगाए गंभीर आरोप-की गयी उच्च स्तरीय शिकायत


कोरबा 06 सितंबर। जिले के व्यापारियों ने पहले ही जीएसटी की अनावश्यक दस्तावेज कार्यवाही से परेशान होने का आरोप लगाया हैं। कोरबा जिले के व्यापारियों पर अब एक और आफत आन पड़ी है, बताया जा रहा हैं की कोरबा जीएसटी विभाग अंतर्गत लगभग 2 महीना पहले उसके सदस्य एक जीएसटी अधिकारी द्वारा छोटे व्यापारियों को अनावश्यक नोटिस भेज कर परेशान किया जा रहा हैं। इससे संबंधित शिकायत केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एवं राज्य वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी से की गई है। शिकायत में उक्त अधिकारी को तत्काल हटाए जाने की मांग की गई है।

जानकारी के अनुसार कोरबा जिले के सर्किल-2 में पदस्थ राज्य कर (जीएसटी) अधिकारी के विरुद्ध लगातार गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं। शिकायत मे कहा गया है की छोटे-छोटे व्यापारी, जो केवल टैक्स-फ्री (मुक्त) कारोबार करते हैं और जिनकी ळैज्त्-3ठ एवं ळैज्त्-1 में कोई अंतर नहीं है, यहाँ तक कि ळैज्त्-2ठ और 3ठ भी पूरी तरह मेल खाते हैं, ऐसे करदाताओं को ।ैडज्-10 नोटिस भेजे जा रहे हैं। इन नोटिसों में उनसे ऑडिट रिपोर्ट, स्टॉक का प्रतिशतवार विवरण, खरीदी-बिक्री के बिल, 26।ै जैसे दस्तावेज माँगे जा रहे हैं। यह माँग जीएसटी के उच्च अधिकारियों द्वारा जीएसटी के ऑडिट में मांगे जाते हैं, वह भी टर्नओवर की सीमा के अनुरूप। जब व्यापारी विधि अनुसार ।ैडज्-11 में ऑनलाइन उत्तर देते हैं, तो उक्त अधिकारी स्वयं व्यापारी को फोन कर यह कहते हैं कि “आप कार्यालय में आकर मिलिए, आपकी बिक्री हम तय करेंगे।” यह आचरण पूर्णतः गैर-कानूनी, अमर्यादित एवं व्यापार विरोधी है।सरकार द्वारा जीएसटी प्रणाली को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य की यह सीधी अवहेलना है।

उल्लेखनीय है कि उनको कोरबा सर्किल-2 में पदस्थ हुए मात्र दो माह ही हुए हैं, और इतने अल्प समय में ही उन्होंने व्यापारियों को अनावश्यक उत्पीड़न एवं अव्यवहारिक नोटिसों से परेशान करना प्रारंभ कर दिया है। यह स्थिति न केवल उनकी कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापारिक वातावरण और बिगड़ सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री स्वयं बार-बार यह आश्वासन देते रहे हैं कि ईमानदार व छोटे व्यापारियों को किसी भी प्रकार की अनावश्यक परेशानियों से मुक्त रखा जाएगा। परंतु कुछ अधिकारी इन नीतियों को ठेंगा दिखाकर व्यापारियों का उत्पीड़न कर रहे हैं, जिससे न केवल व्यापारी वर्ग का भरोसा डगमगा रहा है, बल्कि राज्य और केंद्र सरकार की छवि भी धूमिल हो रही है।

व्यापारियों ने कहा की हमारी मांग हैं की उक्त अधिकारी को तत्काल प्रभाव से कोरबा सर्किल-2 के व्यापारियों के कर निर्धारण के कार्य से हटाकर किसी अन्य कार्य में पदस्थ किया जाए। उच्च स्तरीय जांच की जाए कि अब तक उनके द्वारा इस तरह के कितने अनावश्यक नोटिस काटे गए हैं, ताकि वस्तुस्थिति साफ हो सके। विभाग यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में किसी भी ईमानदार व्यापारी को इस प्रकार की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई का सामना न करना पड़े। उनका तबादला कहीं और कर दिया जाए।

इस संदर्भ में कोरबा चेंबर ऑफ कॉमर्स योगेश जैन ने व्यापारियों का पक्ष लेते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि अगर व्यापारियों को किसी भी अधिकारी द्वारा अनावश्यक रूप से परेशान किया जाता है, तो इसकी उच्च स्तरीय शिकायत के साथ यथा-संभव उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी व्यापारियों को दबाने का प्रयास बेमानी है। ऐसा प्रयास करने वाला कोई भी अधिकारी यह जान ले कि व्यापारी ही शहर की रीढ़ है और रीढ़ पर हमला करना शहर को पंगु बनाने के बराबर है, चेंबर ऑफ कॉमर्स कोरबा ऐसा कदापि नहीं होने देगा और इसका भरपूर विरोध किया जाएगा।

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