नगर निगम का कोहड़िया वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट सौर ऊर्जा से चलेगा

बिजली की वजह से शहर में पानी की आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी
कोरबा 01 सितम्बर। नगर निगम का कोहड़िया वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट सौर ऊर्जा से चलेगा। प्लांट के निकट 2 मेगावॉट का सोलर 9 प्लांट लगाया जाएगा। प्लांट के लगने से बिजली की वजह से शहर में पानी की आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी। अभी निगम को हर साल लगभग 9 करोड़ रुपए तक बिजली बिल देना पड़ रहा है। सोलर प्लांट ग्रिड से जुड़ा होगा। अतिरिक्त बिजली से निगम को आय भी होगी। जल आवर्धन योजना फेस -1 व 2 से निगम के 67 वार्डों में पानी की आपूर्ति की जाती है। इसके लिए कोहड़िया में वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट बना हुआ है। यहां से बांकीमोंगरा नगर पालिका के 30 वार्डों में भी पानी की आपूर्ति की जा रही है। ट्रीटमेंट प्लांट को चलाने के लिए बिजली की खपत अधिक होती है। यहां किनारे में ही सब स्टेशन बना हुआ है। इसके बाद भी आए दिन बिजली बंद होने के कारण प्लांट नहीं चल पाता। इससे गर्मी ही नहीं बाकी समय भी पानी की आपूर्ति प्रभावित होती है। उसकी वजह से ही सौर ऊर्जा प्लांट लगाने की योजना बनाई जा रही है। इसकी लागत 12 करोड रुपए तक आ सक्ती है। आने वाले दिनों में पानी की मांग और बढ़ेगी।
शहर के 52 हजार से अधिक घरों में हो रही पानी की आपूर्ति नगर निगम 67 वाडों के 52 हजार घरों में पानी की आपूर्ति कर रहा है। नल कनेक्शन का विस्तार भी चल रहा है। पानी टंकियों को कोहड़िया वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से ही भरा जाता है। इसके बाद ही पानी की आपूर्ति की जाती है। दोनों योजनाओं से पूरे क्षेत्र को कवर किया गया है। इंटेकवेल व पंप के माध्यम से प्लांट के लिए लेते हैं पानी शहर के 42 वाडों के लिए दर्री बराज के नहर में पंप लगाकर पानी लेते हैं। पश्चिम क्षेत्र के 25 वार्डो के लिए हसदेव नदी के किनारे बने इंटेकवेल के माध्यम से पानी ले रहे हैं। इससे भी बिजली की खपत बढ़ रही है। बिजली की समस्या होने पर इंटेकवेल भी नहीं चल पाता है। बारिश के समय पानी को साफ करने के लिए अधिक समय तक प्लांट को चलाना पड़ता है। शहर के 10 वार्ड के छूटे हुए मोहल्लों में पहुंचेगा पानी नगर निगम ने शहर के 10 वार्डों के छूटे हुए बस्ती और मोहल्ले को पानी देने के लिए योजना बनाई है। इसके तहत तीन स्थानों पर पानी टंकी का निर्माण भी कराया जाना है। ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता भी बढ़ने वाली है। इसके बाद बिजली की खपत और बढ़ जाएगी। पहले बिजली बिल हर महीने 65 लाख तक आता था। यह बढ़कर 70 से 80 लाख तक पहुंच गया है। सोलर प्लांट लगने से बिजली बिल की राशि की बचत होगी। सोलर प्लांट की लागत 10 साल में वसूल हो जाएगी 2 मेगावॉट सोलर प्लांट की लागत 12 करोड रुपए तक आती है। 10 साल में इसकी लागत भी वसूल हो जाएगी। बिजली की खपत आगे और बढ़ेगी। ट्रीटमेंट प्लांट को चलाने के लिए सुबह और शाम बिजली की अधिक जरूरत पड़ती है। इसके बाद प्लांट को बंद रखा जाता है। अधिकारियों का कहना है कि लागत वसूलने के बाद फायदा भी होगा। डब्ल्यूटीपी की क्षमता भी 94 एमएलडी हो जाएगी वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी) की क्षमता अभी 79.81 एमएलडी है। 6 एमएलडी के पुराने प्लांट को तोड़कर 20 एमएलडी क्षमता का नया प्लांट बनाया जाना है। इसके बाद क्षमता बढ़कर 94 एमएलडी हो जाएगी। इसकी वजह से प्लांट को चलाने के लिए बिजली की खपत भी बढ़ेगी। लेकिन सौर ऊर्जा प्लांट लगने से किसी तरह का बिल जमा करना नहीं पड़ेगा। प्लांट लगाने के लिए बना रहे डीपीआर ईई नगर निगम के कार्यपालन अभियंता और जलप्रदाय प्रभारी राकेश मसीह का कहना है कि वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए सोलर प्लांट लगाने डीपीआर बना रहे हैं। इसके बाद जिला प्रशासन को भेजेंगे। डीएमएफ से इसकी मंजूरी मिल गयी है।
