पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर के बाद डॉ. पवनसिंह का अपमान: मंच पर अफसर आगे, जिला पंचायत अध्यक्ष को पीछे की पंक्ति में दिया गया स्थान

कोरबा जिले में आदिवासी अस्मिता बार – बार, तार – तार

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कद्दावर आदिवासी नेता और प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर के बाद अब जिले की अफसरशाही ने एक और आदिवासी नेता का अपमान किया है। डिप्टी सी. एम. और जिला प्रभारी अरुण साव के मंच पर कलेक्टर- एस. पी. और अन्य अधिकारी तो पहली पंक्ति में बैठे नजर आए, लेकिन आदिवासी नेता और जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह को पिछली पंक्ति में स्थान दिया गया। आदिवासी प्रदेश में और आदिवासी मुख्यमंत्री की छत्रछाया में जिले के आदिवासी नेताओं का बार – बार अपमान अनेक गंभीर सवालों को जन्म देता है।

आपको बता दें कि शनिवार को जिला प्रभारी और प्रदेश के डिप्टी सी. एम. अरुण साव ने जिले के पाली नगर में छत्तीसगढ़ में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने रेशम कृषि मेला सह मेरा रेशम, मेरा अभिमान, कार्यक्रम का शुभारंभ किया। वाकया इसी कार्यक्रम का है। समारोह के मंच पर कलेक्टर- एस. पी. एवं कुछ अन्य अधिकारी जहां डिप्टी सी. एम. अरुण साव, विधायक प्रेमचंद पटेल और तुलेश्वर मरकाम के बगलगीर होकर पहली पंक्ति में बैठे थे, वहीं जिला पंचायत अध्यक्ष डॉक्टर पवनसिंह को पिछली पंक्ति में बैठाया गया था। उनके बगल में नगर निगम कोरबा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष, वर्तमान पार्षद हितानंद अग्रवाल भी बैठे हुए थे।

ज़िला पंचायत अध्यक्ष ग्रामीण विकास और पंचायत राज व्यवस्था का एक प्रमुख अंग है। कोरबा जिले में यह पद आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित है। अब तक भाजपा की सरकार रही हो या कांग्रेस की, ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के शासकीय कार्यक्रमों में जिला पंचायत अध्यक्ष को पहली पंक्ति में स्थान मिलता रहा है। शनिवार को पहली बार यह नजारा देखने में आया, जब जिला पंचायत अध्यक्ष मंच में अफसरों की पंक्ति के पीछे बैठे हुए थे। इस व्यवस्था से जिला पंचायत अध्यक्ष डॉक्टर पवनसिंह स्वयं को अपमानित महसूस कर रहे हैं। हालांकि, वे शुरू से अंत तक समारोह के मंच में पिछली पंक्ति में बैठे रहे। मौके पर उन्होंने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई।

लेकिन, बाद में उन्होंने मीडिया से कहा- “पाली में आयोजित केंद्र’ सरकार के रेशम मेला कार्यक्रम में मुझे उपेक्षित महसूस हुआ। यह यदि कोई संगठन का काम होता तो और बात थी, लेकिन यह एक प्रशासनिक आयोजन था, जिसमें अधिकारियों को हर हाल में प्रोटोकॉल का ध्यान रखना चाहिए। एसपी, कलेक्टर और अन्य अधिकारी स्वयं आगे की पंक्ति में बैठे हुए थे। मुझे पीछे की कुर्सी दी गई, यह पद की गरिमा के लिए ठीक नहीं है। साफतौर पर प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। इस मामले में लापरवाही बरती गई है।”

पवन सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष कोरबा

गौरतलब है कि इससे पहले प्रदेश के राज्यपाल रमेन डेका के कोरबा प्रवास के दौरान भी भाजपा के वरिष्ठतम आदिवासी नेता और प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर के साथ भी अपमान जनक व्यवहार सामने आया था। ननकीराम कंवर जब राज्यपाल से मिलकर ज्ञापन सौंप रहे थे, तब कलेक्टर अजित वसन्त राज्यपाल के बगलगीर होकर सोफे पर बैठे हुए थे। हालांकि बकौल ननकीराम कंवर, जब वे ज्ञापन पर राज्यपाल से खड़े- ख़ड़े अपनी बात कहने लगे, जिसमें कलेक्टर की शिकायत थी, तब राज्यपाल ने कलेक्टर को “कमरे से बाहर” कर दिया था।

पाली की घटना के बाद आदिवासी अस्मिता के अपमान की चर्चा एक बार फिर शुरू हो गई है। इसके साथ ही पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर के अपमान का मामला भी फिर से ताजा हो गया है। आश्चर्य की बात है कि पूर्व के मामले में भी कोरबा से विधायक और मंत्री लखनलाल देवांगन और जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव सहित जिले के किसी भी भाजपा नेता की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। ताजा मामले में भी किसी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं की जा सकती। तो क्या यह मान लिया जाए कि जिले में आदिवासी नेतृत्व को हाशिये में रखने की कोई साजिश काम कर रही है?

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