मोदी की गारंटी को पूरा करने व भविष्य को सुरक्षित बनाने की मांग को लेकर मितानिनें और स्वास्थ्य सहयोगी सड़कों पर उतरे

रैली निकाले और कलेक्टर को तीन सूत्रीय मांगों से संबंधित सौंपा ज्ञापन

कोरबा 19 अगस्त। मोदी की गारंटी को पूरा करने और अपने भविष्य को सुरक्षित बनाने की मांग को लेकर मंगलवार को जिले की मितानिनें और स्वास्थ्य सहयोगी सड़कों पर उतरे। घंटाघर चौक से दोपहर 12 बजे करीब 2250 की संख्या में मितानिन आशा, प्रशिक्षक, हेल्थ फैसिलिटेटर व ब्लॉक समन्वक बड़ी रैली के रूप में निकले और जिला कलेक्टर को तीन सूत्रीय मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा।

कार्यक्रम के दौरान मितानिनों ने कहा कि छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं को लगातार ठेका पद्धति के तहत एनजीओ के भरोसे छोड़ना अन्यायपूर्ण है। उल्लेखनीय है कि बीते 29 जुलाई को राजधानी रायपुर के तूता में प्रदेश स्तरीय धरना दिया गया था, जहां मुख्यमंत्री विष्णुदेव सहाय को ज्ञापन सौंपकर आठ दिन की समय-सीमा दी गई थी। संगठन का कहना है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मोदी की गारंटी के तहत मितानिनों की समस्याओं के स्थायी समाधान का वादा किया था, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी।

इसके बाद प्रदेशभर में 7 अगस्त से 13 दिनों तक संभाग स्तरीय धरना-प्रदर्शन हुए, जिसमें कोरबा जिला भी 9 अगस्त रक्षाबंधन के दिन शामिल हुआ। उस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ष्मितानिन पातीष् के जरिए पत्र भेजकर अपनी व्यथा बताई गई थी।

फिलहाल सकारात्मक पहल नहीं दिखने पर मंगलवार को कोरबा में फिर से जोरदार प्रदर्शन हुआ। ज्ञापन में मितानिनों ने स्थायी नियुक्ति, मानदेय में वृद्धि और ठेका प्रणाली खत्म करने की तीन सूत्रीय मांग रखी। अब संगठन की निगाहें सरकार की ओर हैं कि उनकी आवाज कितने दिनों में सुनी जाती है।मोदी की गारंटी को पूरा करने और अपने भविष्य को सुरक्षित बनाने की मांग को लेकर मंगलवार को जिले की मितानिनें और स्वास्थ्य सहयोगी सड़कों पर उतरे। घंटाघर चौक से दोपहर 12 बजे करीब 2250 की संख्या में मितानिन आशा, प्रशिक्षक, हेल्थ फैसिलिटेटर व ब्लॉक समन्वक बड़ी रैली के रूप में निकले और जिला कलेक्टर को तीन सूत्रीय मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा।

कार्यक्रम के दौरान मितानिनों ने कहा कि छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं को लगातार ठेका पद्धति के तहत एनजीओ के भरोसे छोड़ना अन्यायपूर्ण है। उल्लेखनीय है कि बीते 29 जुलाई को राजधानी रायपुर के तूता में प्रदेश स्तरीय धरना दिया गया था, जहां मुख्यमंत्री विष्णुदेव सहाय को ज्ञापन सौंपकर आठ दिन की समय-सीमा दी गई थी। संगठन का कहना है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मोदी की गारंटी के तहत मितानिनों की समस्याओं के स्थायी समाधान का वादा किया था, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी।

इसके बाद प्रदेशभर में 7 अगस्त से 13 दिनों तक संभाग स्तरीय धरना-प्रदर्शन हुए, जिसमें कोरबा जिला भी 9 अगस्त रक्षाबंधन के दिन शामिल हुआ। उस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ष्मितानिन पातीष् के जरिए पत्र भेजकर अपनी व्यथा बताई गई थी।

फिलहाल सकारात्मक पहल नहीं दिखने पर मंगलवार को कोरबा में फिर से जोरदार प्रदर्शन हुआ। ज्ञापन में मितानिनों ने स्थायी नियुक्ति, मानदेय में वृद्धि और ठेका प्रणाली खत्म करने की तीन सूत्रीय मांग रखी। अब संगठन की निगाहें सरकार की ओर हैं कि उनकी आवाज कितने दिनों में सुनी जाती है।

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