अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने 17 प्रमुख ग्लोबल दवा कंपनियों पर कसा शिकंजा

वाशिंगटन. अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने 17 प्रमुख ग्लोबल दवा कंपनियों के सीईओ को पत्र भेजकर अमरीकियों के लिए दवाओं की कीमतें 60 दिन में कम करने के लिए तत्काल कदम उठाने को कहा है। ट्रंप ने जिन कंपनियों को पत्र लिखे हैं उनमें एली लिली, सनोफी, रेजेनरॉन, मर्क एंड कंपनी, जॉनसन एंड जॉनसन और एस्ट्राजेनेका शामिल हैं। ट्रंप ने कहा, अमरीकी नागरिक ब्रांडेड दवाओं के लिए जो कीमतें चुका रहे हैं, वह अमरीका के ही समान विकसित अन्य देशों में चुकाई जाने वाली कीमतों से तीन गुना अधिक है। ट्रंप ने कहा, अमरीका में नई दवाएं उन कीमतों पर ही लॉन्च हों जो जितनी कीमत दूसरे देशों में ली जा रही हैं। ट्रंप के इस नए फरमान से फार्मा और हैल्थकेयर स्टॉक्स में बड़ी गिरावट आई। निफ्टी फार्मा इंडेक्स 3.5% टूट गया। साथ ही कॉपर पर 50% टैरिफ और रूस तेल आयात पर जुर्माने की धमकी से मेटल और ऑयल एंड गैस स्टॉक्स भी करीब 2% गिरे। वहीं पाकिस्तान और बांग्लादेश पर टैरिफ को 19 और 20% करने से भारतीय टेक्सटाइल स्टॉक्स धराशायी हो गए। इनकी डिमांड अब अमरीका में कम हो जाएगी। इससे एशिया-यूरोप के साथ भारतीय शेयर बाजार में भी शुक्रवार को बड़ी गिरावट आई।
नई दवा टैरिफ नीति जल्द
अमरीका में जल्दी ही एक नई दवा टैरिफ नीति भी प्रस्तावित है। अमरीकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड ल्यूटनिक ने कहा, ट्रंप अगले दो हफ्तों में एक दवा नीति पेश करेंगे, जिसमें दवा कंपनियों पर ज्यादा टैरिफ लगाए जाने की संभावना है। अमरीका में प्लांट नहीं लगाने वाली कंपनियों पर भारी टैरिफ लगाया जाएगा टैरिफ लगाने से लोगों के लिए दवाएं तत्काल महंगी हो जाएंगी।

भारतीय कंपनियों पर पड़ेगा बड़ा असर
इससे भारतीय फार्मा कंपनियों को बड़ा नुकसान होने की आशंका है। भारत अमरीकी नागरिकों की दवा की 47% जरूरत पूरी करता है। वित्त वर्ष 2023-24 में भारतीय फार्मा सेक्टर ने अमरीका को 75 हजार करोड़ रुपए का निर्यात किया। यह भारतीय कंपनियों के कुल निर्यात का 31% है। भारतीय फार्मा कंपनियों के रेवेन्यू में अमरीका की हिस्सेदारी 30-50% तक है।
क्या है ट्रंप की नई धमकी
ट्रंप ने अपने पत्र में कहा, अमरीका में फार्मा कंपनियां अपने दवा उत्पादों में मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) की कीमतों को शामिल करने, नई दवाओं के लिए भी ऐसी कीमतों की गारंटी देने के लिए कहा। उन्होंने कहा, अमरीकी दवा कंपनियां विदेशों से जो अतिरिक्त राजस्व अर्जित कर रही हैं, उन्हें अब अमरीकी मरीजों के लिए खर्च करें। ट्रंप ने सभी सीईओ को 29 सितंबर तक पत्र का जवाब भेजने के लिए कहा है। 60 दिन का अल्टीमेटम खत्म होने पर कंपनियां खुद से बदलाव नहीं करतीं, तो सरकार सख्त कदम उठाएगी, ताकि लोगों को महंगी दवाओं से बचाया जा सके। कंपनियों को दवाएं मरीजों को उन्हीं दामों पर देनी होंगी, जिन पर वे बीमा कंपनियों को देती हैं।
