भारत ने तैयार किया मलेरिया के इलाज के लिए पहला स्वदेशी टीका, जल्द ही मलेरिया मुक्त होगा देश

1नई दिल्ली। भारत में जल्द ही मलेरिया रोग खत्म हो सकेगा। भारतीय वैज्ञानिकों ने मलेरिया के खिलाफ पहला स्वदेशी टीका तैयार कर लिया है। यह टीका एक दशक से ज्यादा समय तक मलेरिया से सुरक्षा प्रदान कर सकेगा। टीके के उत्पादन के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने निजी कंपनियों के साथ समझौते की तैयारी शुरू कर दी है।
आईसीएमआर के मुताबिक मलेरिया के नए टीके को फिलहाल एडफाल्सीवैक्स नाम दिया है, जो मलेरिया परजीवी प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम के खिलाफ पूरी तरह असरदार है। इसे आइसीएमआर और भुवनेश्वर स्थित क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र (आरएमआरसी) के शोधकर्ताओं ने मिलकर तैयार किया है। आरएमआरसी के वैज्ञानिक डॉ. सुशील सिंह ने कहा कि नया टीका मानव संक्रमण को रोक सकता है। एडफाल्सीवैक्स में पीएफएस 230 और पीएफएस 48/45 प्रोटीन का एक मिश्रण है। यह संक्रमण रोकने वाले मजबूत एंटीबॉडी बनाता है। इस टीके से मलेरिया के खिलाफ लड़ाई को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
एडफाल्सीवैक्स की फार्मास्युटिकल स्टेबिलिटी बेहद खास है। यह फॉर्मूला कमरे के तापमान पर नौ माह से ज्यादा समय तक प्रभावी रहता है, जिससे महंगी कोल्ड चैन लॉजिस्टिक्स की जरूरत खत्म हो जाती है। इसके कारण यह दूरदराज के क्षेत्रों में भी प्रभावी साबित होगा।
इसलिए हमारी वैक्सीन अच्छी
वर्तमान में देश में मलेरिया के दो टीके उपलब्ध है। इनकी कीमत 800 रुपए है। हालांकि इनका असर 33 से 67 फीसदी के बीच ही है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी व विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से मंजूर आरटीएस और आर21/आर21/मैट्रिक्स-एम टीका दुनिया के कुछ देशों के लिए उपलब्ध हैं। वहीं भारत का टीका रक्त में पहुंचने पर जल्द ही ट्रांसमिशन ब्लॉकिंग यानी संक्रमण का प्रसार रोकने में प्रभावी असर दिखाने लगता है। इसके साथ ही यह किफायती भी है।
