युक्तियुक्तकरण के चंद दिनों बाद ही शिक्षा विभाग में शुरू हो गया अटैचमेंट का खेला, डीसी के सिर पर फोड़ा जा रहा ठीकरा

कोरबा 30 जून। जिला शिक्षा विभाग में एक बार फिर अटैचमेंट का खेला शुरू हो गया है। युक्तियुक्तकरण से दूरस्थ स्थित शिक्षक विहीन व एकल शिक्षकीय स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का दावा किया जा रहा है। लेकिन शासन के प्रतिबंध के बाद भी अटैचमेंट किया जा रहा है। युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के कुछ ही दिनों में धीरे-धीरे एक-एक शिक्षकों को उनके मनपसंद स्कूलों में भेजने की कवायद भी अंदर ही अंदर शुरू कर दी गई है। ऐसा क्या हुआ कि उन्हें अपने ही आदेश को 20 दिन में ही बदलना पड़ गया? इस सवाल का जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकता है।

ऐसा ही आदेश बदलकर राहत देने का एक मामला सामने आया है। कोरबा ब्लॉक के गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल बड़गांव के प्रधान पाठक कमल सिंह कंवर की 31 मई को काउंसिलिंग के बाद 4 जून को कार्यमुक्त कर दिया। इसके साथ ही कोरबा ब्लॉक के ही प्राइमरी स्कूल बरपानी में पदस्थ करने का आदेश जारी कर दिया गया था। यह कमलसिंह को पसंद नहीं था, क्योंकि उन्हें बरपानी से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित गांव के स्कूल में जाना पड़ रहा था। उन्होंने अपनी पहुंच का लाभ उठाया और जिला शिक्षा विभाग को अपना आदेश अगले 15वें दिन बदलना पड़ गया। 19 जून को जारी आदेश में कमलसिंह को उसी आदिवासी बालक आश्रम कोरकोमा में, जहां वे पहले से ही अटैच थे, ज्वाइनिंग करने का आदेश बीईओ कोरबा ने जारी कर दिया। इस व्यवस्था से न तो प्राथमिक शाला बड़गांव में शिक्षक की पूर्ति हुई और न ही प्रायमरी स्कूल बरपानी में। इस संबंध में बीईओ कोरबा संजय अग्रवाल का कहना है कि उक्त आदेश कलेक्टर के अनुमोदन पर ही जारी किया गया है। इस मामले में अधिक जानकारी उनके पास नहीं है।

प्राइमरी स्कूल देवपहरी से शहर पहुंचाया
इसी कड़ी में अटैचमेंट का एक और खेल 25 जून को किया गया। इस दिन जारी आदेश में कोरबा ब्लॉक के प्राइमरी स्कूल आश्रम देवपहरी की प्रधान पाठक मीना सोनी को इसी ब्लॉक के कोरबा शहर के डिंगापुर स्थित उमंग 50 सीटर स्कूल छात्रावास में अधीक्षक बना दिया गया। साथ ही उन्हें आश्रम की व्यवस्था भी संभालने की जिम्मेदारी दी गई है।

आपको बता दें कि राज्य शासन ने प्रदेश भर में सभी विभागों का अटैचमेंट समाप्त करने और इस प्रथा पर प्रतिबंध का आदेश जारी किया है। लेकिन बेलगाम नौकरशाह, चंद दिनों के भीतर ही शासन के आदेश की खुली अवहेलना करते नजर आ रहे हैं।

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