राज्यपाल रमेन डेका ने जगन्नाथ मंदिर पहुंचकर ‘छेरा-पहरा‘ की रस्म निभाई, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी हुए शामिल, देखिये पूरी से लाईव

रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका आज रथ यात्रा पर्व के अवसर पर गायत्री नगर रायपुर स्थित जगन्नाथ मंदिर में आयोजित महाप्रभु श्री जगन्नाथ के रथ यात्रा महोत्सव में शामिल हुए।

राज्यपाल डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भगवान जगन्नाथ की पूजा अर्चना कर ‘छेरा-पहरा‘ की रस्म निभाई। राज्य की प्रथम महिला श्रीमती रानी डेका काकोटी ने श्री जगन्नाथ जी की विधि-विधान से पूजा अर्चना की।

इस दौरान सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक पुरंदर मिश्रा, विधायक धरमलाल कौशिक, अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि ओडिशा के पुरी में आज भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की शुरुआत हो रही है। यह भव्य यात्रा पुरी के जगन्नाथ मंदिर से शुरू होकर गुंडिचा मंदिर तक जाती है। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ साल में एक बार अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाते हैं। रथ यात्रा से एक दिन पहले हजारों की संख्या में भक्तों ने मंदिर के सिंह द्वार पर पहुंचकर रत्न बेदी (गर्भगृह में पवित्र मंच) पर भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ के नबाजौबन दर्शन (युवा रूप) किए।

यह रथ यात्रा कुल 12 दिनों तक चलेगी और इसका समापन 8 जुलाई 2025 को नीलाद्रि विजय के साथ होगा, जब भगवान पुनः अपने मूल मंदिर में लौटेंगे। हालांकि रथ यात्रा का आयोजन 12 दिनों का होता है, इसकी तैयारियाँ महीनों पहले से शुरू हो जाती हैं। इस रथ यात्रा के दौरान कई धार्मिक रस्में, अनुष्ठान और विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

11 जून को स्नान यात्रा के बाद बंद थे सार्वजनिक दर्शन

भगवान जन्ननाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के सार्वजनिक दर्शन 11 जून को स्नान अनुष्ठान के बाद रोक दिए गए थे। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के एक अधिकारी के मुताबिक, मंदिर सुबह 8 बजे से 10.30 बजे तक भक्तों के लिए नबजौबन दर्शन के लिए खुला रहा। उन्होंने बताया कि भगवान जन्ननाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा नबजौबन बेशा पर एक खास युवा पोशाक पहनते हैं। यह अनुष्ठान भगवान जगन्नाथ के कायाकल्प का उत्सव मनाने के लिए किया जाता है। इस दिन को नेत्र उत्सव (आंख खोलने का त्योहार) भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन मूर्तियों की आंखों को रंगा जाता है। जगन्नाथ संस्कृति के शोधकर्ता भास्कर मिश्रा के मुताबिक, ऐसा माना जाता है कि स्नान अनुष्ठान के बाद बीमार होने के कारण देवता भक्तों के सामने प्रकट नहीं होते हैं। रथ यात्रा से पहले वे एक पखवाड़े तक अनासर घर (अलगाव कक्ष) में संगरोध में रहते हैं।

प्रशासन पूरी तरह से तैयार

एसजेटीए के मुख्य प्रशासन अरबिंद पाधी के मुताबिक, नबाजौबन दर्शन के पूरे होने के बाद हमें उम्मीद है कि रथ यात्रा सुचारू रूप से चलेगी। दिन के दौरान, तीनों रथ मंदिर के मुख्य द्वार के सामने खड़े रहेंगे। एसजेटीए अधिकारी ने कहा,दोपहर में उन्हें रथ खड़ा (रथ यार्ड) से खींचा जाएगा। रथों को पार्क करने की रस्में निभाई जाएंगी। तीन लकड़ी के रथों तालध्वज (भगवान बलभद्र का रथ), देवी सुभद्रा का देवदलन और भगवान जगन्नाथ के रथ नंदीघोष का निर्माण पूरा हो चुका है और ये 27 जून को ग्रैंड रोड पर चलने के लिए तैयार है।

आज से शुरू होने वाली रथयात्रा से को लेकर ADG ट्रैफिक दयाल गंगवार ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस साल, एक एकीकृत कमांड और नियंत्रण केंद्र बनाया गया है, जहां हमारे पास एक CCTV निगरानी प्रणाली है जो पूरी तरह से AI आधारित है। हम पूरे पुरी शहर से सभी ट्रैफ़िक और पार्किंग संबंधी जानकारी प्राप्त करते हैं। सभी विभागों के प्रतिनिधियों को जानकारी दे दी गई है और हमने एक वॉर रूम भी स्थापित किया है। हम ट्रैफ़िक उद्देश्यों के लिए ड्रोन का भी उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इसके लिए सिविल पुलिस के साथ हम लगातार समन्व्य स्थापित किए हुए हैं।

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