नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितता उजागर मामले में पत्रकार को जान से मारने की धमकी

(बीएनएस) 2023 की धारा 296 (धमकी देना) और 351(2) (गाली-गलौज) के तहत अपराध पंजीबद्ध

कोरबा 16 जून। महिला एवं बाल विकास विभाग की नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितता उजागर करना एक पत्रकार को भारी पड़ गया। आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगने पर कांग्रेस पार्षद द्वारा पत्रकार को गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी गई। इस गंभीर प्रकरण में कटघोरा थाना में मामला दर्ज कर लिया गया है और पुलिस जांच में जुट गई है।

शिकायतकर्ता पत्रकार ने बताया कि उन्होंने महिला एवं बाल विकास परियोजना कार्यालय में महिला कार्यकर्ता पद की नियुक्ति प्रक्रिया में हुई गड़बड़ियों को लेकर जानकारी मांगी थी। इसके लिए उन्होंने आरटीआई और आवेदन के माध्यम से अधिकारिक रूप से सवाल खड़े किए थे। इसी बात से नाराज होकर वार्ड क्रमांक 02 के कांग्रेस पार्षद हरीश यादव ने पत्रकार को फोन कर न सिर्फ अपशब्द कहे, बल्कि यह धमकी भी दी कि अगर उसने यह मुद्दा उठाना बंद नहीं किया, तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
यह घटना 12 जून 2025 की शाम 4.50 से 5.00 बजे के बीच की बताई जा रही है। पत्रकार ने बताया कि घटना के समय वह अपने घर के बाहर थे और आसपास मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने भी कॉल की पुष्टि की है। मामले में कटघोरा थाना में 14 जून को थ्प्त् क्रमांक 0220 दर्ज की गई है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 296 (धमकी देना) और 351(2) (गाली-गलौज) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि कार्यकर्ता पद की नियुक्ति में वार्ड क्रमांक में हेरफेर कर चयन किया गया। जब उन्होंने इसकी जानकारी सार्वजनिक करने की कोशिश की, तो पार्षद द्वारा दबाव बनाने की कोशिश की गई। पत्रकार ने मांग की है कि केवल धमकी देने वाले पार्षद पर ही नहीं, बल्कि नियुक्ति प्रक्रिया की भी निष्पक्ष जांच की जाए।

थाना प्रभारी का सख्त रुख
इस घटना पर थाना प्रभारी धर्म नारायण तिवारी ने त्वरित संज्ञान लेते हुए कहा, इस प्रकार की गुंडागर्दी किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पत्रकार या कोई भी नागरिक सूचना मांगने का पूरा अधिकार रखता है। मामले में जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

घटना के बाद स्थानीय सामाजिक संगठनों, पत्रकार संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने एकजुट होकर घटना की कड़ी निंदा की है और पार्षद के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। मामला अब सिर्फ धमकी तक सीमित न रहकर महिला बाल विकास विभाग की नियुक्तियों की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

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