कोरबा के कारोबारी का तार जुड़ रहा पाकिस्तान के जासूसी नेटवर्क से, NIA ने मारा छापा तो हो गया फरार, प्रदेश भर में हड़कम्प मचा

कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में पाकिस्तान समर्थित अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क से जुड़ी गंभीर और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा चलाए गए देशव्यापी गुप्त ऑपरेशन में कोरबा के एक संदिग्ध कारोबारी की भूमिका उजागर हुई है, जिसका संबंध पहले से गिरफ्तार CRPF के निलंबित सहायक उप निरीक्षक मोती राम जाट से जुड़ा पाया गया है। इस पूरे मामले की तह तक जाने वाली विशेष खोजी रिपोर्ट रायपुर के एक अंग्रेजी दैनिक ने प्रकाशित की है।

NIA का बहु–राज्यीय गुप्त ऑपरेशन: कोरबा बना विशेष केंद्र

NIA ने 31 मई को आठ राज्यों—दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, असम और छत्तीसगढ़—में एक साथ समन्वित तलाशी अभियान चलाया। कोरबा जिले की एक संदिग्ध लोकेशन पर भी छापा मारा गया, जहां एक स्थानीय कारोबारी के पाकिस्तान समर्थित नेटवर्क से जुड़े होने की संभावना के आधार पर कार्रवाई की गई।

इस पूरी कार्रवाई को “Need to Know Basis” पर अंजाम दिया गया। इसका अर्थ है कि स्थानीय पुलिस, खुफिया एजेंसियों और यहां तक कि जिला स्तर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को भी छापे की पूर्व सूचना नहीं दी गई थी, ताकि अभियान की गोपनीयता बरकरार रहे।

गिरफ्तार मोती राम जाट की पृष्ठभूमि की जांच में सामने आया है कि वह 2015 से 2017 के बीच रायपुर के बाराडेरा कैंप में तैनात था। उस दौरान वह गरियाबंद जिले के संवेदनशील इलाकों में ड्यूटी पर भेजा जाता था। यहीं पर उसकी मुलाकात कोरबा के उस संदिग्ध कारोबारी से हुई थी जो इस जांच में अब फरार है।

मोती राम जाट की अगली पोस्टिंग जम्मू–कश्मीर के पहलगाम में हुई, जहां वह एक पाकिस्तानी महिला इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (PIO) के संपर्क में आ गया। प्रारंभ में उसने मीडिया से जुड़ी जानकारी साझा करने के नाम पर संवाद स्थापित किया, जो धीरे–धीरे जासूसी गतिविधियों में बदल गया।

संवेदनशील जानकारी पहुंची पाकिस्तान

सूत्रों के अनुसार, CRPF से संबंधित संवेदनशील ऑपरेशनल प्लान, तैनाती संबंधी डेटा, और आंतरिक गोपनीय सूचनाएं जाट के माध्यम से सीधे पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स को भेजी गईं। यह नेटवर्क महिला और पुरुष पाकिस्तानी एजेंटों के संयुक्त संचालन से काम कर रहा था, जिसका संचालन सोशल मीडिया और साइबर माध्यमों से किया जा रहा था।

सूत्रों का कहना है कि कोरबा में फरार कारोबारी की भूमिका सिर्फ सूचनाओं के आदान–प्रदान तक सीमित नहीं, बल्कि वह इस पूरे नेटवर्क की स्थानीय ग्राउंड सपोर्ट यूनिट के रूप में कार्यरत था।

डिजिटल निगरानी और आगे की रणनीति

NIA और IB के संयुक्त समन्वय से कोरबा में संदिग्ध के डिजिटल ट्रेल (मोबाइल, सोशल मीडिया, बैंकिंग और इंटरनेट एक्टिविटी) पर नजर गहराई से रखी जा रही है। छत्तीसगढ़ पुलिस को तकनीकी रूप से इस जांच में सहयोग के लिए निर्देशित किया गया है, हालांकि इस पूरे ऑपरेशन की बागडोर पूरी तरह NIA के हाथों में ही है।

इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि यह नेटवर्क केवल एक कारोबारी या जवान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें छत्तीसगढ़ और आसपास के इलाकों में फैले कुछ और सहयोगी और स्लीपर एजेंट भी शामिल हो सकते हैं। आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारी या पूछताछ की संभावना को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं।

सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत

छत्तीसगढ़ का पावर हब कोरबा बेहद खास है। कोयला खदान और पावर प्लांट सहित यहां महत्वपूर्ण मिनीमाता हसदेव बांध है। बालको का एल्युमिनियम संयंत्र है। केवल प्रदेश नहीं बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में कोरबा जैसी जगहों से यदि इस तरह के जासूसी नेटवर्क का संचालन हो रहा है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि पाकिस्तान समर्थित तंत्र भारत की आंतरिक सुरक्षा में सेंध लगाने के नए–नए तरीके अपना रहा है। यह भी एक चेतावनी है कि स्थानीय स्तर पर सामान्य नागरिक या कारोबारी चेहरों के पीछे भी ऐसे खतरनाक नेटवर्क छिपे हो सकते हैं।

यह मामला केवल एक गिरफ्तारी या छापे का नहीं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा, खुफिया प्रणाली और सामाजिक सजगता की एक बड़ी परीक्षा है। कोरबा में NIA की गुप्त जांच अब एक ऐसे मोड़ पर है, जहां से यह पूरा प्रकरण देशभर में एक बड़ा खुलासा बन सकता है।

आपको बता दें कि तीन दशक पहले एक पाकिस्तानी नागरिक कोरबा में अपने एक रिश्तेदार का कारोबार देखा करता था। मघ्य प्रदेश में तब अवैध रूप से प्रदेश में निवासरत विदेशियों की पहचान और तलाश का अभियान चलाया गया था, तब एकाएक वह व्यक्ति गायब हो गया था।

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