नवाचार आधारित कृषि उद्यमिता पर कृषि महाविद्यालय कोरबा में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

कोरबा 11 मई। कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र कटघोरा जिला कोरबा में सतत नए कार्यक्रमों का आयोजन कर छात्र-छात्राओं के उत्थान तथा समावेशी विकास हेतु नए-नए कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता रहा है। जिसके तहत 9 मई को अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय डॉ. एस.एस. पोर्ते के निर्देशानुसार कृषि छात्रों के लिए रोजगार के अवसर कैसे बढ़ेंगे, विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के प्रमुख वैज्ञानिक एवं प्रोफेसर डॉ. हुलास पाठक विभागाध्यक्ष कृषि व्यवसाय प्रबंध एवं राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत रफ्तार स्कीम आर ए बी आई के तहत कृषि से जुड़े हुए छात्रों एवं युवाओं के लिए नवाचार पर प्रशिक्षण प्रदान करते हैं तथा छात्रों को उनके नए आइडिया के साथ स्टार्टअप भी देते हैं। जिसमें आवश्यकता अनुसार फंडिंग की भी व्यवस्था भी की जाती हैं। इसी कड़ी में डॉ. हुलास पाठक का कृषि छात्रों के बीच में नवाचार में कृषि उद्यमिता विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला में मुख्य वक्ता एवं विषय विशेषज्ञ के रूप में आना हुआ। जिसमें सर्व प्रथम उनका स्वागत कार्यकारी अधिष्ठाता डॉ. दुष्यंत कौशिक ने पुष्पगुच्छ भेंट कर किया, साथ ही कु. निशा एवं लैब तकनीशियन साइना सिद्दीकी ने भी स्वागत किया। कार्यशाला में डॉ. हुलास पाठक ने सभी छात्रों से उनके विषय तथा नवाचार एवं एंटरप्रेन्योरशिप के संबंध में जानकारी ली एवं प्रशिक्षण के दौरान उनका नए-नए आइडिया और विचार कैसे आते हैं और उन पर कैसे आगे बढ़कर काम किया जाता है इसके विषय में विस्तृत जानकारी दी।
छात्रों के द्वारा स्टार्टअप के संबंध में बहुत सारे शंका का निराकरण भी डॉ. पाठक के द्वारा किया गया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रकार के नवाचार के विषयों पर चर्चा की गई तथा छात्रों ने कृषि से जुड़े कई सारे नवाचार पर जानकारी प्राप्त किया कार्यक्रम उपरांत छात्रों ने स्वयं में आत्मविश्वास को बढ़ा हुआ पाया। डॉ. दुष्यंत कौशिक ने कार्यशाला के उपरांत प्रोफेसर श्री पाठक को कृषि महाविद्यालय में अध्ययनरत चतुर्थ वर्ष में पंजीकृत छात्रों के लिए तैयार किया गया। मधुमक्खी पालन इकाई को दिखाया गया एवं वहां से मधुरस निकलना, मधुरस के अतिरिक्त अन्य उत्पाद तैयार करना और बी हाइ कैसे निकाला जाता है इस पूरी प्रक्रिया को सजीव प्रदर्शन कर विस्तृत रूप से समझाया गया। मधुमक्खी पालन के संबंध में विशेष रूप से रूबी, सौम्या, नवीन, बिना, स्वाति और अन्य छात्रों के कार्य के प्रति समर्पण को भी बताया गया। कार्यशाला के आयोजन में मुख्य योगदान डॉ. रोशन भारद्वाज, डॉ. साधना साहा, साइना सिद्दीकी, डी.पी. पटेल सहित समस्त स्टाफ तथा छात्रों का रहा।
