कोरबा भाजपा: पार्षदों ने रिजेक्ट किये कितने हितानंद? यहां जानिए

कोरबा 9 मार्च। नगर पालिका निगम कोरबा के सभापति चुनाव में जो कुछ हुआ उससे भारतीय जनता पार्टी में तो हड़कंप मचा ही हुआ है लेकिन उससे कहीं ज्यादा सनसनी शहर की आबो-हवा में फैली हुई है। लोगों में चर्चा है कि भाजपा पार्षदों ने एक हितानंद नहीं, बल्कि कम से कम 5 से 6 हितानंदों को रिजेक्ट किया।

नगर निगम के सभापति प्रत्याशी के नाम को भाजपा के प्रदेश संगठन ने तय किया था। इस चुनाव के लिए प्रदेश स्तर से नियुक्त पर्यवेक्षक, वरिष्ठ भाजपा नेता और विधायक पुरन्दर मिश्रा ने तो केवल पार्टी के प्रमुख नेताओं और पार्षदों की उपस्थिति में सभापति प्रत्याशी के रूप में हितानंद अग्रवाल के नाम की घोषणा की थी, जिसे पार्टी टिकट पर जीतकर आये पार्षदों ने कथित रूप से मानने से इनकार कर दिया और पार्षद नूतन सिंह राजपूत को अपना प्रत्याशी चुन लिया। यही नहीं उसे जीत दिलाकर सभापति पद पर निर्वाचित भी करा दिया।

पहली नजर में ऐसा लगता है कि भाजपा पार्षदों ने एक हितानंद अग्रवाल को रिजेक्ट किया। लेकिन, सच्चाई यह है, कि भाजपा पार्षदों ने 5 से 6 हितानंदों को रिजेक्ट किया है। इस बात को समझने के लिए सबसे पहले भाजपा में प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया को समझना पड़ेगा। भाजपा में जिला स्तर पर एक कोर कमेटी होती है, जो किसी भी चुनाव के लिए प्रत्याशियों के नाम का पैनल बनाकर प्रदेश संगठन को भेजती है। प्रदेश से किसी एक नाम पर निर्णय लिया जाता है, जिसकी घोषणा जिले की बैठक में की जाती है।

इस मामले में भी यही हुआ। जैसा कि कोरबा विधायक और श्रममंत्री लखनलाल देवांगन ने स्पष्ट किया है कि जिले से 5- 6 नाम सभापति पद के लिए प्रदेश में भेजे गए थे। उन्होंने नाम नही बताया लेकिन चुनाव से पहले वरिष्ठ पार्टी नेता अशोक चावलानी, वरिष्ठ पार्षद नरेन्द्र देवांगन, हितानंद अग्रवाल, चंद्रलोक सिंह, लक्ष्मण श्रीवास के दावेदार होने की चर्चा पार्टी के भीतर और बाहर हो रही थी। लेकिन पार्षदों ने पार्टी से बगावत की तो इन सबको रिजेक्ट कर दिया और नूतन सिंह राजपूत को अपना प्रत्याशी बना लिया? अब सवाल उठता है कि क्यों? इस सवाल का जवाब तलाशना भाजपा के लिए आवश्यक हो गया है। देखना है कि भाजपा संगठन आगे क्या कदम उठाता है?

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