सिगरेट के एक टुकड़े ने दिलाई हत्या के आरोपियों को उम्र कैद की सजा

साढे चार साल बाद दंपत्ति मर्डर केस में कोर्ट ने सुनाया फैसला
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के हाबड़ा में करीब साढ़े चार साल पहले हुए दंपति के मर्डर केस के तीन दोषियों को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। डबल मर्डर के तीनों दोषियों के पकड़े जाने से सजा तक की कहानी फिल्मी है, जहां सिगरेट के बट ने पुलिस को हत्यारोपियों तक पहुंचा दिया। जब यह वारदात हुई तो तब यह ब्लाइंड केस था। सिगरेट बट पर मिले फिंगर प्रिंट के साक्ष्य और मोबाइल फोन रिकॉर्डिंग सजा के लिए महत्वपूर्ण सबूत साबित हुए।
16 सितंबर 2020 को उत्तर 24 परगना जिले के हाबड़ा में राम कृष्ण और उनकी पत्नी लीला रानी मंडल की उनके घर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। छानबीन करने पहुंची पुलिस जब मौके पर पहुंची तो उसे सिर्फ दो लाशें मिलीं। इस केस का कोई चश्मदीद गवाह या सीसीटीवी फुटेज भी नहीं था। पुलिस को घटनास्थल पर सिर्फ सिगरेट के कुछ टुकड़े मिले। पुलिस सिर्फ इसी क्लू के सहारे छाबनी में जुट गई। फरेंसिक लैब में सिगरेट बट पर मौजूद फिंगर प्रिंट और डीएनए को सुरक्षित रखा गया। इसके बाद पुलिस ने मारे गए मंडल दंपति के रिश्तेदार और परिचितों से पूछताछ शुरू की। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि दंपति का अपनी बेटी निवेदिता संधू-दामाद बंती संधू से विवाद चल रहा था। बेटी- दामाद राम कृष्ण और लीला रानी पर अपनी संपत्ति बेचकर पैसे देने का दबाव बना रहे थे। शुरुआती सुराग मिलते ही पुलिस ने निवेदिता और बंटी के मोबाइल फोन को सर्विलांस पर लिया और कॉल डिटेल हासिल किए। पुलिस ने दोनों को हिरासत में लिया। पूछताछ में पता चला कि बंती संधू ने अजय दास नाम के किलर को 50 हजार रुपये में हत्या की सुपारी दी थी। अब पुलिस ने साक्ष्य जमा करना शुरू किया। पुलिस को अजय दास के मोबाइल से कुछ ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मिलीं। इन रिकॉर्डिंग से पता चला कि बंती संधू और निवेदित्ता संधू ने हत्या की साजिश रची थी। यह रिकॉर्डिंग अजय ने ऐहतियात के तौर पर संभाल कर रखे थे ताकि वारदात के बाद सुपारी देने वाला पैसे देने से मुकर न जाए। इस दौरान सिगरेट के टुकड़ों के डीएनए एनालिसिस में पता चला कि उस पर मौजूद डीएनए बंती संधू और किलर अजय दास का ही है। कॉल रिकॉर्डिंग में मौजूद आवाज भी आरोपियों से मैच हो गई। पुलिस के अनुसार, बंती और निवेदिता संधू लगभग 7 लाख रुपये के कर्ज में डूबे हुए थे। वे अपने सास-ससुर पर अपनी संपत्ति बेचकर पैसे देने का दबाव बना रहे थे।
