‘पोती की खुशी के लिए करनी पड़ी यह रस्म’, वैदिक रीति-रिवाज से शादी पर घिरे DMK महासचिव ने दी सफाई

चेन्नई। DMK के महासचिव दुरईमुरुगन ने अपनी पोती की शादी में वैदिक रीति-रिवाजों के पालन पर खेद जताया है और लोगों से इस मामले का राजनीतिकरण न करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि उन्होंने बस अपनी पोती की उस इच्छा को पूरा किया, जिसमें वह वैदिक रीति-रिवाजों से शादी करना चाहती थी।

रीति-रिवाजों और मंत्रोच्चार के बाद आलोचना

शादी में वैदिक रीति-रिवाजों और मंत्रोच्चार के बाद दुरईमुरुगन की आलोचना हुई। द्रविड़ कड़गम के अध्यक्ष के. वीरमणि ने वैदिक मंत्रोच्चार को लेकर उनकी आलोचना की और सवाल उठाया कि वे पार्टी के मुख्य सिद्धांतों, तर्कवाद और आत्म-सम्मान, से कैसे दूर हो गए। टीवीके नेता और वित्त मंत्री मैरी विल्सन ने भी डीएमके पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। आलोचनाओं का जवाब देते हुए, दुरईमुरुगन ने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपनी पोती की वैदिक रीति-रिवाजों से शादी करने की इच्छा पूरी की थी।

‘पोती की इच्छा की पूरी’

दुरईमुरुगन ने अपने बयान में कहा, मेरी पोती, जिसने विदेश में पढ़ाई की है, ने मुझे बताया कि वह दूसरी जाति के एक व्यक्ति से प्यार करती है और उससे शादी करना चाहती है। उसने मुझे यह भी बताया कि वे वैदिक रीति-रिवाजों से शादी करना चाहते हैं। इसलिए, उसकी इच्छा के अनुसार, उसकी शादी वैदिक रीति-रिवाजों से संपन्न हुई।

उन्होंने कहा, मैं ऐसी स्थिति में था जहां मुझे अपनी पोती की इच्छा पूरी करनी थी। मुझे इस घटना पर खेद भी है। उन्होंने लोगों से यह भी अपील की कि वे इस मामले को राजनीतिक रंग न दें।

विरोध करती रही है डीएमके

डीएमके, जो तर्कवाद को अपने मुख्य वैचारिक सिद्धांतों में से एक मानती है, पारंपरिक रूप से सार्वजनिक और निजी कार्यक्रमों में संस्कृत मंत्रों और वैदिक रीति-रिवाजों का विरोध करती रही है। इसके बजाय, पार्टी ने पेरियार की आत्म-सम्मान शादियों को बढ़ावा दिया है, जो सामाजिक समानता पर जोर देती हैं और जाति-आधारित प्रथाओं तथा धार्मिक अनुष्ठानों को खारिज करती हैं।

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