पेंशनर्स एसोसिएशनः कोल इंडिया के विनिवेश फंड से सुरक्षित हो सेवानिवृत्त कर्मचारियों का भविष्य, पीएम मोदी को लिखा पत्र

कोरबा, 7 नवम्बर। कोल इंडिया लिमिटेड और उसकी अनुषंगी कंपनियों के विनिवेश से सरकार को मिली राशि का एक हिस्सा सेवानिवृत्त कोयला कर्मचारियों के कल्याण और पेंशन सुरक्षा के लिए आरक्षित करने की मांग उठी है। आल इंडिया कोल पेंशनर्स एसोसिएशन (एआइसीपीए) ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर पेंशन एवं कल्याण कोष बनाने का आग्रह किया है।
एसोसिएशन के संयोजक पीके सिंह राठौर ने पत्र में कहा कि लाखों सेवानिवृत्त कोयला कर्मचारियों और अधिकारियों ने परिवार और स्वास्थ्य की परवाह किए बिना देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की। ये कर्मचारी सीएमपीएस-1998 के तहत आते हैं और उन्हें जीवनभर बिना महंगाई राहत के निश्चित पेंशन मिलती है। वर्ष 2010 से पहले सेवानिवृत्त पेंशनर सबसे अधिक प्रभावित हैं। कई पूर्व निदेशकों और सीएमडी को 10 हजार रुपये से कम मासिक पेंशन मिल रही है, जबकि करीब 1.5 लाख पेंशनरों को महज एक हजार रुपये प्रतिमाह मिलते हैं।
पत्र में कहा गया है कि कोल इंडिया में विनिवेश की शुरुआत वर्ष 2010 में 10 प्रतिशत आइपीओ से हुई थी। कई चरणों में सरकार की हिस्सेदारी घटकर अब लगभग 61 प्रतिशत रह गई है। विनिवेश अब अनुषंगी कंपनियों तक पहुंच गया है। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) में इक्विटी बिक्री हो चुकी है, जबकि सीएमपीडीआइएल, एमसीएल और एसईसीएल में भी विनिवेश की योजना है।
एसोसिएशन ने कहा कि सरकार का पूंजी पुनर्गठन व्यापक आर्थिक नीति का हिस्सा है, लेकिन संपत्ति बनाने वाले कर्मचारियों की अनदेखी हुई है। उसने वर्ष 2010 से अब तक कोल इंडिया के शेयरों के विनिवेश से सरकार को मिली राशि और बीसीसीएल, सीएमपीडीआइएल व एसईसीएल की हिस्सेदारी बिक्री से अपेक्षित राजस्व का ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है।
एसोसिएशन का कहना है कि सार्वजनिक संपत्तियां बेचकर मिली राशि जन-कल्याणकारी योजनाओं में खर्च की गई, फिर भी पांच लाख कोयला पेंशनर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कोल माइंस पेंशन स्कीम में हर तीन साल में समीक्षा का प्रावधान है, लेकिन दशकों से पेंशन में सार्थक बढ़ोतरी नहीं हुई। प्रधानमंत्री से विनिवेश प्राप्तियों का एक हिस्सा पेंशन और सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याण कोष में देने की मांग की गई है, ताकि कोष को पुनर्जीवित कर महंगाई के अनुरूप पेंशन बढ़ाई जा सके।
