छत्तीसगढ़ में औद्योगिक जमीन के नियमों में बड़ा बदलाव, अब भूखंडों का एकीकरण और उप-विभाजन होगा आसान

रायपुर। छत्तीसगढ़ में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने और उपलब्ध औद्योगिक जमीन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए भूमि प्रबंधन नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। संशोधित प्रावधानों के तहत अब एक ही औद्योगिक क्षेत्र में स्थित सटे हुए भूखंडों का एकीकरण और पात्र औद्योगिक भूखंडों का उप-विभाजन आसान होगा। इसके अलावा अतिरिक्त भूमि के उपयोग, आवेदन शुल्क और पट्टा अवधि को लेकर भी नए नियम निर्धारित किए गए हैं।

उपलब्ध संशोधन पाठ के अनुसार, ये बदलाव भारत सरकार की डी-रेग्युलेशन टास्क फोर्स की प्राथमिकता क्षेत्र-3 यानी भूमि उपयोग सुगमता से जुड़ी अनुशंसाओं के अनुपालन के उद्देश्य से किए गए हैं। नए प्रावधानों से औद्योगिक इकाइयों को भूमि प्रबंधन से जुड़ी प्रक्रियाओं में राहत मिलने की उम्मीद है।

CSIDC जारी करेगा प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची

संशोधित नियमों के अनुसार, छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (CSIDC) ऐसी गतिविधियों की नकारात्मक सूची अधिसूचित करेगा, जिन्हें औद्योगिक भूमि पर अनुमति नहीं दी जाएगी। इस सूची में शामिल नहीं होने वाली गतिविधियां संबंधित नियमों के अधीन अनुमत मानी जाएंगी। इससे औद्योगिक भूखंडों पर स्वीकार्य गतिविधियों को लेकर स्पष्टता बढ़ेगी।

एक ही औद्योगिक क्षेत्र के भूखंडों का हो सकेगा एकीकरण

अब एक ही औद्योगिक क्षेत्र में स्थित सटे हुए दो या अधिक औद्योगिक भूखंडों को एक किया जा सकेगा। इसके लिए आबंटी को आबंटन प्राधिकारी के पास ऑनलाइन सूचना देनी होगी। यह सुविधा केवल उन्हीं भूखंडों के लिए उपलब्ध होगी, जो एक ही व्यक्ति या संस्था के नाम पर आबंटित हैं।

यदि भूखंड अलग-अलग आबंटियों के नाम पर हैं, तो एकीकरण से पहले निर्धारित नियमों के अनुसार उनका अंतरण कराना होगा। एकीकरण के दौरान स्वीकृत सड़क, खुली भूमि, सार्वजनिक उपयोग क्षेत्र और भूमि उपयोग की श्रेणी में बदलाव नहीं किया जा सकेगा। साथ ही प्रीमियम, भू-भाटक और संधारण शुल्क सहित सभी बकाया भुगतान करना अनिवार्य होगा।

15 कार्य दिवस में आपत्ति नहीं तो एकीकरण को मिलेगी मंजूरी

ऑनलाइन सूचना प्राप्त होने के बाद आबंटन प्राधिकारी को निर्धारित आधारों पर आपत्ति होने की स्थिति में 15 कार्य दिवस के भीतर कारण सहित सूचना देनी होगी। तय समय में आपत्ति नहीं मिलने पर नियमानुसार भूखंडों का एकीकरण स्वीकृत माना जाएगा। इसके बाद संयुक्त भूखंड के संशोधित अभिलेख और नक्शे को प्रमाणित किया जाएगा।

हालांकि, जिन भूखंडों के निरस्तीकरण का नोटिस या आदेश लंबित है अथवा जिन पर न्यायालयीन विवाद चल रहा है, उनका एकीकरण नहीं किया जा सकेगा।

औद्योगिक भूखंडों का उप-विभाजन भी होगा संभव

नए प्रावधानों के तहत उत्पादनरत औद्योगिक इकाई का आबंटी अपने भूखंड को दो या अधिक हिस्सों में विभाजित कर सकेगा। इसके लिए अपने ही नाम पर ऑनलाइन सूचना देना पर्याप्त होगा। इस प्रक्रिया में आंशिक समर्पण और दोबारा आबंटन की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।

उप-विभाजन के बाद प्रत्येक नए भूखंड के लिए अलग पहुंच मार्ग होना जरूरी होगा। आंतरिक सड़क और अन्य जरूरी अधोसंरचना का निर्माण आबंटी को अपने खर्च पर कराना होगा। साथ ही स्वीकृत मास्टर ले-आउट और सार्वजनिक उपयोग क्षेत्र से जुड़ी शर्तों का पालन करना होगा।

प्रत्येक नए भूखंड का क्षेत्रफल कम से कम 300 वर्गमीटर

उप-विभाजन के लिए न्यूनतम क्षेत्रफल की शर्त भी निर्धारित की गई है। प्रत्येक अलग भूखंड का क्षेत्रफल कम से कम 300 वर्गमीटर होना चाहिए। इसके अलावा उप-विभाजन के माध्यम से अलग किए जाने वाले भूखंडों का कुल क्षेत्रफल मूल भूखंड के 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकेगा।

यह सुविधा केवल नियमों के अनुसार उत्पादनरत औद्योगिक इकाइयों को मिलेगी। जिन भूखंडों पर निरस्तीकरण की कार्रवाई लंबित है या न्यायालयीन विवाद चल रहा है, वे इस सुविधा के पात्र नहीं होंगे।

एकीकरण और उप-विभाजन के लिए कितना लगेगा शुल्क?

औद्योगिक भूखंडों के एकीकरण और उप-विभाजन के लिए उद्यमों की श्रेणी के अनुसार आवेदन शुल्क तय किया गया है।

  • सूक्ष्म एवं लघु उद्यम: 5,000 रुपये
  • मध्यम एवं वृहद उद्यम: 10,000 रुपये

इसके अतिरिक्त लागू नियमों के अनुसार पट्टाभिलेख संशोधन शुल्क, भू-भाटक और संधारण शुल्क भी देना होगा।

अतिरिक्त जमीन रखने पर देना होगा सात गुना भू-भाटक

औद्योगिक भूखंडों के अतिरिक्त हिस्से को लेकर भी नियमों में बदलाव किया गया है। यदि किसी आबंटी के पास ऐसी अतिरिक्त भूमि है, जिससे अलग भूखंड बनाया जा सकता है, तो निर्धारित प्रावधानों के अनुसार प्रब्याजि की वापसी सहित उस भूमि को वापस लिया जाएगा। इसके बाद उसे ई-नीलामी के माध्यम से पुनः आबंटित किया जाएगा।

वहीं, यदि अतिरिक्त भूमि से अलग भूखंड नहीं बनाया जा सकता, उसके लिए पृथक पहुंच मार्ग उपलब्ध नहीं है या उसका क्षेत्रफल 300 वर्गमीटर से कम है, तो उस हिस्से पर पूर्ण उपयोग अथवा भूमि वापस किए जाने तक प्रचलित वार्षिक भू-भाटक का सात गुना प्रतिवर्ष देना होगा।

एकीकरण के बाद सबसे पहले समाप्त होने वाली पट्टा अवधि होगी लागू

यदि एकीकृत किए जाने वाले भूखंडों की पट्टा अवधि अलग-अलग है, तो एकीकरण के बाद संयुक्त भूखंड पर उस पट्टे की अवधि लागू होगी, जो सबसे पहले समाप्त हो रही है। ऐसे में उद्योग संचालकों को एकीकरण का निर्णय लेने से पहले अपने भूखंडों की शेष पट्टा अवधि की जांच करनी होगी।

औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने की कोशिश

राज्य में औद्योगिक भूमि के उपयोग को अधिक व्यवस्थित और आसान बनाने के उद्देश्य से ये बदलाव किए गए हैं। ऑनलाइन सूचना, 15 कार्य दिवस में आपत्ति की समयसीमा और पात्र इकाइयों को उप-विभाजन की सुविधा से प्रशासनिक प्रक्रिया सरल होने की उम्मीद है। हालांकि, इन प्रावधानों का लाभ लेने के लिए उद्योग संचालकों को पात्रता, भूमि उपयोग, शुल्क और पट्टे से संबंधित सभी शर्तों का पालन करना होगा।

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