किसानों के लिए खुशखबरीः 12.45 करोड़ से बनेंगे 5 नए एनीकट, 6 हजार हेक्टेयर में लहलहाएगी फसल

कोरबा, 19 अक्टूबर। जिले में ग्रीष्मकाल के दौरान सूख जाने वाले नदी-नालों के पानी को संरक्षित कर सिंचाई सुविधा बढ़ाने की तैयारी है। इसके लिए जल संसाधन विभाग ने पांच नए एनीकट के निर्माण की कार्ययोजना तैयार की है। योजना पर करीब 12.45 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। विभाग ने इसे वर्ष 2026-27 के बजट में शामिल करते हुए शासन से राशि आवंटित करने का प्रस्ताव भेजा है।

इन एनीकट के निर्माण से करीब छह हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इससे किसानों को खरीफ के साथ रबी फसल की खेती में भी लाभ मिल सकेगा। जिले में हसदेव बांगो जैसी बड़ी सिंचाई परियोजना होने के बावजूद बड़ी संख्या में किसान सिंचाई सुविधा से वंचित हैं। जल संसाधन विभाग की लघु सिंचाई परियोजनाओं का लाभ भी सीमित क्षेत्र तक ही पहुंच पा रहा है। वर्तमान में जिले में करीब 98 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि पर धान की खेती होती है। इनमें से लगभग 48 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, जबकि शेष 50 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि वर्षा पर निर्भर है। ऐसे में नदी-नालों के पानी को रोककर संरक्षित करने और उसका उपयोग सिंचाई के लिए करने की योजना बनाई गई है।

विभाग का मानना है कि नए एनीकट बनने से सिंचाई का रकबा बढ़ने के साथ आसपास के गांवों में निस्तारी के लिए भी पानी उपलब्ध होगा। जल संरक्षण से भूजल स्तर में सुधार की संभावना है। इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों को शासन की कृषि विकास योजनाओं का लाभ दिलाने में भी मदद मिलेगी। जल संसाधन विभाग ने पुराने जलाशयों से निकलने वाली नहरों की मरम्मत और जीर्णोद्धार के लिए भी शासन से राशि मांगी है। इसमें चौतमा के वसुंधरा नाले का व्यपवर्तन, डोंगानाला जलाशय की नहर का जीर्णोद्धार तथा हरदी-नेवसा और झोंकानाला जलाशय से निकलने वाली नहरों के सुधार कार्य शामिल हैं। इन कार्यों के पूरा होने से जलाशयों के पानी का बेहतर उपयोग हो सकेगा और सिंचाई व्यवस्था मजबूत होगी।

जल संसाधन विभाग ने करतला विकासखंड के कोडमसरा नाला, पोड़ी उपरोड़ा क्षेत्र के परला और झुनकीडीह तथा घुमानीडांड़ क्षेत्र में तान नदी और ग्राम चोरभट्ठी के पास छिंदई नाला सहित पांच स्थानों पर एनीकट निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया है। इन स्थानों का चयन स्थानीय जल उपलब्धता और सिंचाई की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है। एनीकट के माध्यम से बारिश के दौरान नदी-नालों में बहने वाले पानी को रोककर उपयोग में लाया जा सकेगा। इससे आसपास के खेतों को सिंचाई के लिए पानी मिलने के साथ ग्रामीणों की निस्तारी संबंधी जरूरतें भी पूरी हो सकेंगी।

कटघोरा अनुविभाग के आमाखोखरा में करीब 12 वर्ष पहले बने डायवर्सन डैम का पानी अब तक किसानों के खेतों तक नहीं पहुंच पाया है। नहर निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण का मामला लंबित होने से परियोजना का काम अटका हुआ है। इसका खामियाजा क्षेत्र के किसानों को भुगतना पड़ रहा है। जलाशय और नहर करीब 52 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जाना था। निर्माण में देरी के कारण परियोजना की लागत में लगभग 50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वृद्धि हो गई है। वहीं, प्रभावित किसानों को अधिग्रहित जमीन का मुआवजा देने को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है।

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