तुर्क मूल की नेत्री अब बर्लिन की मेयर@ डॉ. सुधीर सक्सेना

तुर्क मूल की नेत्री अब बर्लिन की मेयर
• डॉ. सुधीर सक्सेना
आप्रवासी तुर्क दंपत्ति की संतान 45 वर्षीया एलीफ एराल्प, जो पेशे से वकील हैं। चुनावी जद्दोजहद के बाद अब बर्लिन की महापौर हैं। बर्लिन के मतदाताओं ने वामपंथी पार्टी ‘डी लिंके’ की उम्मीदवार को जिताकर जर्मनी के नगरीय-इतिहास में सर्वथा नया इतिहास लिखा है। हालांकि, उनकी जीत के बाद माना जा रहा है कि जर्मनी को अपनी ममदानी मिल गयी है, अलबत्ता न सिर्फ उनके तार न्यूयार्क के तुर्श-जुबां महापौर जोहरान ममदानी से जुड़े हुये हैं, बल्कि ममदानी का एक सलाहकार कुछ हफ्ते पहले उनकी मदद के लिये न्यूयार्क से उड़कर बर्लिन पहुंचा था। यही नहीं, एलीफ ने अपना चुनाव प्रचार भी उन्हीं बिंदुओं पर केंद्रित किया, जिनके बूते ममदानी न्यूयार्क के प्रथम नागरिक बने थे।
रविवार की रात बर्लिन के लगभग एक चौथाई मतदाताओं ने एलीफ को वोट देकर उन्हें विजेता की पायदान पर पहुंचा दिया। इससे उनकी पार्टी डी-लिंके कई दहाइयों से बर्लिन पर राज कर रही सोशल डेमोक्रेट्स और चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की कंजर्वेटिव, जिसके पास महापौर का पद था, पार्टी से आगे निकल गयी। अन्यत्र घोर दक्षिणपंथी एएफडी की जीत के बरक्स यह जीत मायने रखती है। जीत के जश्न में हर्षविह्वल एलीफ ने कहा -‘ मेरे जैसे लोगों से वास्तव में इस देश में मेयर बनने की उम्मीद नहीं की जाती है। बहरहाल, हमारे शहर में नफरत पर प्यार और न्याय की जीत हुई है।” गौरतलब है कि उस शहर ने उसे मेयर चुना है, जहां पैंतालीस साल पहले उसके माता-पिता भागकर शरण लेने आये थे। उनके मां-पिता गास्टार-बाइटर (प्रवासी-श्रमिक) के तौर पर बर्लिन नहीं आये थे, बल्कि तुर्की में कू-दे-ता के बाद उन्हें बंदी बना लिया गया था। वे श्रमिक नेता व समाजवादी थे। इस्तांबुल में सक्रिय पिता सेल्जुक डॉक्टर थे और मां नारीवादी। उन्हें इसलिये जेल से रिहा किया गया, क्योंकि मां हल्या गर्भवती थीं और प्रसव समीप था। युवा दंपत्ति भागकर जर्मनी आये और सन 1981 में म्यूनिख में एलीफ का जन्म हुआ। एलीफ को बचपन से ही जातीयता और भेदभाव का सामना करना पड़ा। उनके घर के द्वार तुर्की से आये शरण-याचकों के लिये खुले रहते थे। मां नर्सिंग का प्रशिक्षण देती थीं, लेकिन उन्हें प्रशिक्षण की मान्यता के लिऐ 15 वर्ष संघर्ष और इंतजार करना पड़ा। बेटी ने दस साल की उम्र में पिता के गैराज में कन्वर्जेशन- क्लब खोला और फिर एंटी-न्यूक्लियर आंदोलन से जुड़ीं। सन 2017 में उसने डी-लिंके से नाता जोड़ा। हैम्बुर्ग विश्वविद्यालय से कानून में सनद के बाद वह बर्लिन चली आई थी और दो साल के अनिवार्य कानूनी प्रशिक्षण के बाद पार्टी के संसदीय समूह से जुड़ गई। सन 2019 में उसने प्रवासी श्रमिकों की आवाज बुलंद करने के लिये ‘कानाक्स’ की स्थापना की। वह अपने पति और दो बच्चों के साथ दक्षिण-मध्य बर्लिन की तुर्क बहुल क्रयूजबर्ग में रहती है। चुनाव प्रचार में उसने जर्मन के साथ-साथ टर्किश का खूब इस्तेमाल किया। हिफाजत के लिहाज से वह बच्चों को कैमरे और कैंपेन से दूर रखती है। बतर्ज ममदानी आगे बढ़ी एलीफ ने सीनेटर सेंडर्स की शैली को अपनाया। वह कार्पोरेट माफिया के सख्त खिलाफ है और चाहती है कि बर्लिन किफायती शहर बने। ममदानी की तरह सस्ते मकान उसकी वरीयता हैं। उसकी योजना कार्पोरेट स्वामित्व के 200000 (दो लाख) से अधिक फ्लैटों को सार्वजनिक हाथों में सौंपने की है। वह कहती हैं -“यह शहर सभी का है, सट्टेबाजों का नहीं। “किसी भी तरह के दमन और आतंक का विरोध करते हुये वह कहती है कि वह ईसाइयों, मुसलमानों और यहूदियों समेत सभी की हिफाजत के लिये वचनबद्ध हैं।”

