बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार कराया गया

कोरबा, 7 अक्टूबर। स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ रही है और वे धीरे-धीरे रोग मुक्त भी हो रहे हैं। प्राचीन आयुर्वेदिक इम्युनाइजेशन पद्धति इस मामले में बेहद कारगर साबित हो रही है। यही कारण है कि अभिभावक अपने बच्चों को नियमित रूप से स्वर्ण बिंदु प्राशन संस्कार से लाभान्वित करा रहे हैं।
‘चलो आयुर्वेद की ओर’ मिशन के तहत लायंस क्लब कोरबा एवरेस्ट पतंजलि चिकित्सालय एवं श्री शिव औषधालय के संयुक्त तत्वाधान में बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए ‘बच्चे रहे स्वस्थ’ योजनान्तर्गत पतंजलि चिकित्सालय श्री शिव औषधालय महानदी काम्प्लेक्स निहारिका में सोमवार को अति शुभ पुष्य नक्षत्र में आयुर्वेदिक इम्यूनाईजेसन प्रोग्राम के तहत स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार कराया गया। इससे कई बच्चे लाभान्वित हुए। स्वर्ण प्राशन करा रहे श्रुति सारथी एवं दिव्यांशु सारथी की माताजी श्रीमती श्याम सारथी ने बताया की मेरे बेटे दिव्यांशु सारथी और बेटी श्रुति सारथी को मैं 2022 से नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा के पास प्रत्येक माह के पुष्य नक्षत्र में स्वर्ण बिंदु प्राशन संस्कार दिला रही है। श्रुति सारथी एवं दिव्यांशु सारथी को आज 4 साल से किसी तरह की कोई समस्या नहीं हुई ठंडी, गर्मी, बरसात सभी तरह के मौसम आये और गये पर मेरे बच्चों को सर्दी खांसी तक नहीं हुई और वो बहुत ही ऐक्टिव भी रहते है। इसके लिए उन्होंने पतंजलि चिकित्सालय, श्री शिव औषधालय संस्थान की संचालिका श्रीमती प्रतिभा शर्मा एवं संस्थान के चिकित्सक नाड़ीवैद्य डॉ.नागेन्द्र नारायण शर्मा का आभार जताया।स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार शिविर में नेत्रनन्दन साहू, कमल धारिया, अरुण मानिकपुरी, अश्वनी बुनकर, सिद्धराम सारथी, अनुराग कंवर, शैल कुमारी निषाद, गुनगुन राठीया एवं पंचकर्म टैकनीशियन पिंकी बरेठ ने विशेष रूप से उपस्थित होकर अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
प्राचीन ग्रंथों में इसका वर्णनः डॉ. नागेंद्र
डॉ.नागेन्द्र नारायण शर्मा ने बताया कि स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार बच्चों में किये जाने वाले 16 मुख्य संस्कारों में से स्वास्थ्य की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण संस्कार है जो हजारो वर्ष पुरानी आयुर्वेदिक टीकाकरण पद्धति है। जिसका उल्लेख हमारे आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथ काश्यप संहिता एवं सुश्रुत संहिता में प्रमुखता से है जो प्राचीन समय से चला आ रहा है। लेकिन अब यह संस्कार विलुप्त हो गया है जिसे पुनर्जीवित करने का प्रयास संस्थान द्वारा स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार के माध्यम से किया जा रहा है।
