लेमरू में वन्यजीव संरक्षण सप्ताहः विद्यार्थियों को बताया वन और वन्यप्राणियों का महत्व

कोरबा, 5 अक्टूबर। वन्यजीवों की सुरक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। जंगलों के बीच बसे ग्रामीण अंचलों में वन्यजीव संरक्षण की जागरूकता ही मानव और वन्यप्राणियों के बीच बेहतर तालमेल की मजबूत नींव बन सकती है। इसी उद्देश्य को लेकर लेमरू वन परिक्षेत्र अंतर्गत शासकीय हाई स्कूल लेमरू में 3 अक्टूबर को वन्यजीव संरक्षण सप्ताह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वन्यजीव विशेषज्ञ जितेंद्र सारथी ने विद्यार्थियों को जंगल, वन्यप्राणियों और पर्यावरण संरक्षण का महत्व समझाते हुए प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने का संदेश दिया।

सारथी ने बच्चों को समझाया वन्यजीवों का महत्वद्य वन विभाग द्वारा डीएफओ के निर्देश तथा एसडीओ एवं वन परिक्षेत्र अधिकारी के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में जितेंद्र सारथी ने विद्यार्थियों को बताया कि वन और वन्यजीव प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जंगलों की सुरक्षा, वन्यप्राणियों के प्राकृतिक आवास का संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करना आज की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने बच्चों को वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील रहने और किसी भी वन्यप्राणी को संकट में देखकर स्वयं जोखिम उठाने के बजाय संबंधित विभाग को सूचना देने के प्रति जागरूक किया। कार्यक्रम के दौरान स्कूली बच्चों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की और वन, वन्यप्राणियों तथा पर्यावरण से जुड़े विषयों में रुचि दिखाई। उत्कृष्ट सहभागिता करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। इस पहल ने बच्चों को प्रकृति के करीब आने, वन्यजीवों के महत्व को समझने और उनके संरक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारी पहचानने का अवसर दिया।

वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के माध्यम से दिया गया संदेश स्पष्ट है कि जंगल केवल पेड़-पौधों का समूह नहीं, बल्कि असंख्य जीवों का प्राकृतिक घर है। वन्यजीवों की सुरक्षा, उनके आवास का संरक्षण और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना पर्यावरण के संतुलन के लिए जरूरी है। विद्यालयों में ऐसे आयोजन बच्चों के भीतर प्रकृति के प्रति प्रेम और संरक्षण की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेमरू हाई स्कूल में आयोजित यह कार्यक्रम वन्यजीव संरक्षण के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में सराहनीय पहल रहा। विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने यह उम्मीद जगाई कि जागरूक बच्चे भविष्य में अपने गांव, जंगल और पर्यावरण की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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