नवरात्र व दीपावली को लेकर तैयारीः पारंपरिक कला और पुश्तैनरफ्तार मिली कुम्हारों के चाक को, तैयार हो रहे मिट्टी के दीये

कोरबा, 29 सितंबर। नवरात्र और दीपावली के पर्व में अब ज्यादा समय शेष नहीं रह गया है। ऐसे में कोरबा शहर सहित जिलेभर में मिट्टी के दीये और दीपमालिकाएं बनाने का काम जोर-शोर से शुरू हो गया है। कुम्हार एवं प्रजापति समुदाय के परिवार इन दिनों दिन-रात मेहनत कर पारंपरिक मिट्टी के दीयों को आकार देने में जुटे हुए हैं। त्योहारों को देखते हुए बाजार में मिट्टी के दीयों की मांग बढने की उम्मीद है।

कोरबा के सीतामढ़ी सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवासरत प्रजापति समाज के अनेक परिवार वर्षों से अपने पुश्तैनी व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। चाक पर मिट्टी को आकार देने से लेकर दीयों को सुखाने और फिर उन्हें पकाने तक की पूरी प्रक्रिया में परिवार के सदस्य जुटे हुए हैं। त्योहार नजदीक आते ही इन कारीगरों की व्यस्तता भी बढ़ गई है। प्रजापति समाज के लोगों का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा मिट्टी लाने पर किसी प्रकार की रॉयल्टी नहीं लिए जाने और मिट्टी से तैयार होने वाले पारंपरिक उत्पादों पर कर संबंधी राहत मिलने से उन्हें काफी सुविधा हुई है। इससे पुश्तैनी कारोबार से जुड़े परिवारों को अपना काम आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है। बाजार में आर्टिफिशियल दीये, इलेक्ट्रिक लाइट और सजावटी सामानों की उपलब्धता बढने के बावजूद दीपावली पर मिट्टी के पारंपरिक दीयों की मांग आज भी कायम है। धार्मिक आस्था और परंपरा के कारण बड़ी संख्या में लोग दीपावली के अवसर पर घरों, प्रतिष्ठानों और मंदिरों में मिट्टी के दीये जलाते हैं।

कुम्हार समाज के अनुसार, दीपावली के दौरान कोरबा जिले में बड़ी संख्या में मिट्टी के दीयों की बिक्री होती है। वहीं नवरात्र के दौरान भी सामान्य आकार से लेकर बड़े आकार के मिट्टी के दीपक अखंड ज्योति के लिए उपयोग किए जाते हैं। इससे कारीगरों को दीपावली के साथ-साथ नवरात्र में भी अच्छा काम मिल जाता है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर प्रशासन और भाजपा द्वारा आयोजित सेवा संकल्प अभियान के विभिन्न कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में मिट्टी के दीयों के उपयोग से भी स्थानीय कुम्हार एवं प्रजापति समाज को काम मिला। बड़ी संख्या में दीयों की मांग होने से कारीगरों को अतिरिक्त रोजगार मिला और उनके चेहरे पर खुशी नजर आई।

पारंपरिक कला और पुश्तैनी व्यवसाय को जीवित रखने वाले प्रजापति समाज के कारीगरों को उम्मीद है कि इस वर्ष नवरात्र और दीपावली के दौरान मिट्टी के दीयों की बिक्री अच्छी रहेगी। त्योहारों के साथ बढ़ती मांग ने कुम्हारों के चाक की रफ्तार बढ़ा दी है और अब पूरा परिवार मिट्टी को आकार देकर दीपों की रोशनी तैयार करने में जुटा हुआ है।ी व्यवसाय को जीवित रखने वाले प्रजापति समाज के कारीगरों को उम्मीद है कि इस वर्ष नवरात्र और दीपावली के दौरान मिट्टी के दीयों की बिक्री अच्छी रहेगी। त्योहारों के साथ बढ़ती मांग ने कुम्हारों के चाक की रफ्तार बढ़ा दी है और अब पूरा परिवार मिट्टी को आकार देकर दीपों की रोशनी तैयार करने में जुटा हुआ है।

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