एचपीसी दर पर भुगतान सहित प्रभावितों की सुध नहीं, बुड़बुड़ माइंस में रोका उत्पादन

अल्टीमेटम देने के बाद प्रदर्शन, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का मिला समर्थन

कोरबा 22 सितंबर। औद्योगिक जिले कोरबा में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की मेगा माइंस सहित दूसरी माइंस में कोयला उत्पादन बढ़ाने के लक्ष्य को ध्यान में रख काम किया जा रहा है। कोरबा एरिया की बुड़बुड़ परियोजना का कामकाज मंगलवार को कामगारों की समस्याओं और प्रबंधन की उदासीनता को लेकर ठप्प कर दिया गया। उसे गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का समर्थन मिला।

सूत्रों के अनुसार बुड़बुड़ परियोजना में परिवहन संबंधी गतिविधियों के लिए जो ट्रक चालक लगाए गए हैं उन्हें ट्रांसपोर्टर के द्वारा काफी कम वेतन दिया जा रहा है। मांग की जा रही है कि एचपीसी दर पर भुगतान की व्यवस्था की जाए। स्थानीय स्तर पर होने वाले कार्यों में प्रभावितों के लिए रोजगार की व्यवस्था है। पिछले दिनों लोगों ने प्रबंधन को समस्या सुलझाने का अल्टीमेटम दिया था। कोई नतीजे नहीं आने पर आंदोलन की धमकी दी और आज मौके पर प्रदर्शन करते हुए कामकाज को ठप कर दिया। काफी संख्या में लोगों के साथ गोंगपा समर्थक भी इस कड़ी में शामिल हुए। प्रदर्शन के कारण बुड़बुड कोल माइंस में उत्पादन संबंधी गतिविधियां प्रभावित हुईं।

दूसरी ओर ट्रांसपोर्टिंग पर भी इसका असर पड़ा। मामले की जानकारी होने पर पाली, दीपका और कटघोरा पुलिस यहां पहुंची ताकि कानून व्यवस्था की स्थिति पर नजर और निगरानी रखी जा सके। दोपहर 1 बजे तक परियोजना प्रभावितों के द्वारा किया जा रहा प्रदर्शन रहा था। एसईसीएल के अधिकारियों की पहुंच भी यहां पर हुई जिन्होंने अपने स्तर पर संबंधित लोगों से बातचीत कर समाधान के रास्ते तलाशने का प्रयास किए। प्रदर्शन में परियोजना प्रभावितों के साथ गोंगपा की राजनीति से जुड़े कुछ लोग शामिल हुए। इससे पहले कोरबा जिले के अंतर्गत चिरमिरी वेस्ट में शामिल रानीअटारी और विजय वेस्ट माइंस में भी इस तरह के प्रदर्शन हो चुके हैं। मौके पर अब यथास्थिति बन चुकी है।

उधर साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड दीपिका क्षेत्र के अंतर्गत हरदी बाजार के अमगांव में सुरक्षा कारण से तीन सरकारी भवनों को चार दिन पहले ध्वस्त कर दिया गया। प्रशासन का कहना है कि खनन क्षेत्र के नजदीक उनकी स्थिति और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की गई। जबकि इससे पहले ही संबंधित कार्यालय को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया। इस मामले को लेकर लोगों में नाराजगी है। कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल और कुछ गांव के लोगों ने इस मामले को लेकर सोमवार को बिलासपुर में कोयला कंपनी के शीर्ष प्रबंधन से बातचीत की। उन्होंने साफ कहा की जब तक समस्याएं हल नहीं होगी, जमीन को अर्जित नहीं करने दिया जाएगा। अधिकारियों ने मामले का समाधान किस तरह से हो सकता है, इसके लिए अधिकारियों ने चार से पांच दिन इंतजार करने को कहा है। संबंधित लोगों को अधिकारियों के अगले रवैया की प्रतीक्षा है।

वही कोरबा जिले में एसईसीएल के कुसमुंडा क्षेत्र से संबंधित परियोजना प्रभावितों की समस्याएं भी काफी समय से अटकी हुई है। लोगों के आरोप है कि मुआवजा के साथ पुनर्वास और रोजगार के मामले में उतनी गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है जो जरूरी है। अधिकारियों की ओर से केवल उन्हें आश्वासन देने का काम किया जा रहा है लेकिन कार्यवाही का ग्राफ अपेक्षित नहीं है। इन्हीं वजह से कुसमुंडा में सीजीएम कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन से लेकर नारेबाजी और घेराव के मामले आम हो गए हैं। कहना गलत नहीं होगा कि लोगों के साथ-साथ प्रबंधन अब इस तरह की गतिविधियों के लिए आदी हो गया है।

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