जातिगत आरक्षण की समीक्षा कर वास्तविक जरूरतमंदों को मिले अवसरः धनेश सिंह

कोरबा 01 सितंबर। जातिगत आरक्षण की वर्तमान व्यवस्था को लेकर अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह ने कहा है कि अब समय आ गया है कि देश में आरक्षण व्यवस्था की निष्पक्ष एवं व्यापक समीक्षा की जाए। आरक्षण का मूल उद्देश्य सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा में लाना और उन्हें समान अवसर उपलब्ध कराना था, लेकिन बदलते सामाजिक एवं आर्थिक परिदृश्य में इसकी समीक्षा आवश्यक हो गई है।

अधिवक्ता सिंह ने कहा कि किसी व्यक्ति की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिोि नजरअंदाज कर केवल जाति के आधार पर अवसर निर्धारित करना उचित नहीं है। आज समाज में विभिन्न वर्गों के भीतर भी आर्थिक असमानता है। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सरकारी योजनाओं एवं आरक्षण का वास्तविक लाभ उन लोगों तक पहुंचे, जिन्हें वास्तव में इसकी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गरीब और वंचित व्यक्ति किसी भी जाति या वर्ग से हो सकता है। इसलिए सरकार को आरक्षण व्यवस्था में आर्थिक स्थिति, सामाजिक पिछड़ापन, शैक्षणिक अवसरों की उपलब्धता तथा वास्तविक वंचितता जैसे मानकों को भी पर्याप्त महत्व देने पर विचार करना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी जाति, समुदाय या वर्ग का विरोध करना नहीं है, बल्कि समान अवसर और निष्पक्ष व्यवस्था की मांग करना है। सामाजिक न्याय का अर्थ यह होना चाहिए कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को आगे बढने का उचित अवसर मिले और कोई भी वास्तविक जरूरतमंद व्यवस्था के लाभ से वंचित न रहे।

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